नई दिल्ली: केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और सेक्टोरल फेडरेशन/एसोसिएशनों के संयुक्त मंच की बैठक हाइब्रिड मोड में हुई। बैठक ने श्रम संहिताओं की अधिसूचना के बाद की स्थितियों की समीक्षा की। यह उत्साहजनक है कि श्रमिक वर्ग ने इन श्रम-विरोधी संहिताओं के खिलाफ स्वतःस्फूर्त प्रतिरोध व्यक्त किया, जिन्हें सरकार पिछले पाँच वर्षों से ट्रेड यूनियन आंदोलन के कड़े विरोध के कारण लागू नहीं कर सकी थी।
देशभर में, विशेषकर कार्यस्थल स्तर पर व्यापक विरोध-प्रदर्शन हुए।
यहाँ तक कि असंगठित श्रमिकों और BMS से जुड़े श्रमिकों ने भी विरोध में हिस्सा लिया और संहिताओं की प्रतियाँ जलाईं। पत्रकारों के बीच भी व्यापक विरोध हुआ।
26 नवंबर 2025 को देश ने जिला/खंड मुख्यालयों से लेकर कार्यस्थल स्तर तक भारी जुटान देखा।
संयुक्त किसान मोर्चा ने भी गाँवों तक में बड़ी संख्या में जुटान किया, बीज विधेयक और श्रम संहिताओं के साथ-साथ अपनी बुनियादी मांगों के समर्थन में। अन्य वर्गों, विशेषकर छात्रों और युवाओं ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया।
हम सभी लोगों को इस संघर्ष में शामिल होने के लिए धन्यवाद देते हैं।
सरकार और शासक वर्गों में फैले भय को दर्शाते हुए विज्ञापनों, पेड न्यूज़ और लेखों के माध्यम से श्रम संहिताओं के तथाकथित ‘लाभों’ का अभूतपूर्व झूठा प्रचार फैलाया जा रहा है।
श्रम विभागों और अदालतों में पूरी तरह अराजकता व्याप्त है।
पहली बार, सभी विपक्षी दलों ने श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग पर एकजुटता दिखाई है।
हम इस कदम का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि वे संहिताओं की वापसी तक अपना समर्थन बनाए रखेंगे।
बैठक ने इंडिगो प्रकरण का संज्ञान लिया जिसने लाखों लोगों को प्रभावित किया है।
यह घटना कॉरपोरेट अहंकार की पराकाष्ठा और श्रमिकों व यात्रियों की सुरक्षा के प्रति घोर लापरवाही को दिखाती है।
सामरिक क्षेत्रों के निजीकरण और एकाधिकारकरण के प्रति केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की चेतावनियाँ बिल्कुल सही साबित हुई हैं।
हम न्यायिक जांच, दोषियों को कड़ी सजा और सभी प्रभावित लोगों को पर्याप्त मुआवजे की मांग करते हैं।
सरकार को इस अनुभव से सीख लेनी चाहिए और बिजली, पेट्रोलियम, रेलवे, रक्षा, दूरसंचार और बैंकिंग जैसे सामरिक क्षेत्रों में जल्दबाज़ी में किए जा रहे निजीकरण को तुरंत रोकना चाहिए।
यह निर्णय लिया गया कि श्रम संहिताओं की वापसी तक चरणबद्ध और निरंतर संघर्ष छेड़ा जाएगा।
संयुक्त मंच ने फरवरी 2026 में देशव्यापी सामान्य हड़ताल करने का निर्णय लिया।
हड़ताल की तारीख 22 दिसंबर 2025 की अगली बैठक में घोषित की जाएगी।
ट्रेड यूनियनें कार्यस्थल/स्थानीय/जिला/राज्य स्तर पर विरोध कार्रवाइयों का आयोजन करेंगी।
सभी राज्य इकाइयाँ एक सप्ताह के भीतर बैठक करके विस्तृत योजनाएँ बनाएँगी — जैसे जत्थे, रैलियाँ, जन-संपर्क अभियान, व्यापक जुटान, सेक्टोरल कार्रवाइयों का तीव्रीकरण आदि,
जो प्रत्यक्ष कार्रवाई और पहली चरण की सामान्य हड़ताल की ओर ले जाएंगी।
संयुक्त मंच, संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) तथा विभिन्न वर्गों के संघर्षरत मंचों के साथ समन्वय करेगा
जो इस कॉरपोरेट-समर्थक साम्प्रदायिक सरकार की जन-विरोधी नीतियों के विरुद्ध संघर्ष कर रहे हैं।
हम संसद के सभी विपक्षी दलों और देश के विभिन्न वर्गों—विशेषकर युवाओं और छात्रों—से अपील करते हैं
कि वे इस संघर्ष में श्रमिक जनता के बुनियादी अधिकारों और देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने की रक्षा हेतु एकजुटता और समर्थन दें।
