पंजाब डायरी
पुलिस की पक्षपातपूर्ण कार्यवाही के विरूद्ध धरना-प्रदर्शन
भारतीय क्रान्तिकारी माक्र्सवादी पार्टी (आर.एम.पी.आई.) की नकोदर तहसील समिती के आह्वान पर भारी संख्या में पहुँचे महिलाओं एवं पुरूषों द्वारा स्थानीय पुलिस की पक्षपातपूर्ण कार्यवाही के विरोध में स्थानीय बाजारों में जबर्दस्त रोष प्रर्दशन करने के बाद डी.सी.पी. कार्यालय समक्ष धरना दिया गया। एकत्रित जनसमूह को संबोधित करते हुए पार्टी के जिलाध्यक्ष साथी दर्शन नाहर तथा राज्य समिती के सदस्य साथी मनोहर सिंह गिल्ल ने दोष लगाया कि स्थानीय पुलिस सत्ताधारीयों के इशारों पर काम करते हुए जनसाधारण को न्याय से वंचित रखती है तथा दोषियों को संरक्षण देती है। उन्होंने स्थानीय, जिला तथा राज्य प्रशासन को आगाह किया कि पुलिस की ढीली तथा एकतरफा पहुँच के चलते अमन कानून के लिए गंभीर स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। जनसभा को साथी जसविन्द्र सिंह ढेसी, निर्मल सिंह आधी, बख्शी पंडोरी, निर्मल मलसीयाँ, बख्शी कंग, बलवीर सिंह, मेजर खुर्लापुर, मंगत राम, मक्खन नूरपुरी, नत्था सिंह, रमेश बंगड़, सर्बजीत ढेरीयाँ ने संबोधित करता। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने धरने में पहुँच कर चार दिन के भीतर सभी लम्बित मामले निपटाने का भरोसा दिया जाने उपरांत संघर्ष स्थगित किया गया। इस धरने का पूर्ण खर्चा तुरन्त सभी ने योगदान देते हुआ पूरा किया।
मगनरेगा वर्कर्ज का संघर्ष : एक रिपोर्ट
पंजाब में मगनरेगा वर्कर्ज की अनेक समस्यायें है। यूं तो देश भर में ही सरकार द्वारा एक प्रकार से उनका शोषण हो रहा है, लेकिन पंजाब में यह स्थिति कुछ अधिक ही चिंताजनक है। अभी कुछ समय पहले लम्बे समय के बाद देश के अलग-अलग राज्यों में इन मजदूरों की दैनिक मजदूरी में वृद्धि की गई थी। चार वर्षों के लम्बे अंतराल के बाद पंजाब में इनकी दैनिक मजदूरी 240 से बढ़ाकर 241 रूप की गई अर्थात केवल एक रूपए की बढ़ौत्तरी। इस से भद्दा मजाक इनके साथ क्या हो सकता है? इसके अतिरिक्त कुछ महीने पहले सम्पन्न हुए पंचायती चुनावों में चुनकर आए सरपंचों ने राजनैतिक बदलाखोरी तथा भाई-भतीजावाद को प्राथमिकता देते हुए मगनरेगा वर्करज की हाजरी व कामकाज की देखरेख के लिए उनमें से ही नियुक्त मेहटों को मनमर्जी से बदलना शुरू कर दिया। इससे मगनरेगा वर्कर्ज के अंदर दबी बैठी क्रोध की चिंगारी ज्वाला बन कर धधकने लगी। वैसे इन वर्कर्ज की कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण व उचित मांगें और भी हैं। इन्हें केवल 100 दिन भी नहीं मिलता। इनकी मांग है कि इन्हें पूरे साल अर्थात 365 दिन काम दिया जाए। काम न मिलने पर भत्ता दिया जाए। दैनिक मजदूरी 500 रुपए की जाए। मुफ्त बीमा किया जाए तथा मेहटों को बिना जांच पड़ताल किये न बदला जाए।
उपरोक्त मांगों को लेकर जिला होशियारपुर की मगनरेगा वर्कर्ज यूनियन की प्रधान सुरजीत कौर की अध्यक्षता में मुलाजिम भवन होशियारपुर में एक मीटिंग करके निर्णय किया गया कि इस संबंध में यूनियन जिलाधीश से मिलकर उन्हें मांग पत्र सौंपेगी तथा ऐसे ही मांग पत्र ब्लाक स्तर पर ब्लाक विकास तथा पंचायत अधिकारियों को सौंपे जाएंगे तथा इसके बाद ब्लाक स्तर पर रोष रैलियां तथा धरना प्रदर्शन किए जाएंगें। मगनरेगा मजदूरों के इस संघर्ष को भारी समर्थन मिला है। यूनियन का एक विशाल डैपुटेशन पंजाब अधीनस्थ सेवा संघ (प.स.स.फ.) के प्रधान सतीश राणा के नेतृत्व में जिलाधीश की अनुपस्थिति में अतिरिक्त जिलाधीश से मिला। इसी प्रकार जिले के लगभग सभी बी.डी.पी.ओ. को मांग पत्र सौंपे गए।
इसके बाद ब्लाक माहिलपुर, ब्लाक होशियारपुर-1 तथा 2,ब्लाक भूंगा, कार्यालयों के सामने मगनरेगा वर्करों ने विशाल रोष प्रदर्शन करके अपना विरोध जताया है। इन प्रदर्शनों में जिले के प्रधान तथा महासचिव के साथ साथ ब्लाक के नेताओं ने मगनरेगा मजदूरों को संबोधित किया। प.स.स.फ. के राज्याध्यक्ष तथा प.स.स.फ. के ब्लाक पदाधिकारियों ने भी पूर्ण सहयोग दिया। इन रोष प्रदर्शनों को देखते हुए लगभग सभी ब्लाक विकास तथा पंचायत अधिकारियों ने यूनियन के साथ बातचीत करके मेहटों को बदले जाने की कार्यवाही पर रोक लगाने तथा उनकी अन्य मांगें उच्चाधिकारियों को भेजने का आश्वासन दिया है।
यूनियन ने निर्णय किया है कि जल्दी ही यूनियन की बैठक बुला कर संघर्ष का जायजा लिया जाएगा तथा अगर आवश्यकता अनुभव हुई तो संघर्ष को और आगे ले जाने पर विचार किया जाएगा।
रिपोर्ट :- शिव कुमार अमरोही
अमृतसर के कपड़ा श्रमिकों का संघर्ष
अमृतसर के कपड़ा उद्योग में काम करते श्रमिकों एटक, सीटू तथा सी.टी.यू. से सबंधित संगठनों के आह्वान पर, तनख्वाह तथा रेटों में कम से कम बीस प्रतिशत वृद्धि की माँग को लेकर विगत 27 जून को एक दिवसीय हड़ताल की गई। वर्णनीय है कि तनख्वाह तथा रेटों में 9 प्रतिशत पिछला समझौता जून 2017 को हुआ था जिसकी अवधि जुलाई 2018 में समाप्त हो चुकी है। बेतहाशा बढ़ती मुल्य वृद्धि के अनुरूप वेतन में 20 प्रतिशत वृद्धि की न्यायोचित माँग को लागू करने से मिल मालिकान की आनाकानी के विरूद्ध सभी ट्रेड़ यूनियनों के सांझा मंच की ओर से उपरोक्त एक दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया गया था। मालिकान को उक्त माँग संबंधी माँगपत्र दिसंबर 2018 को दिया गया था इसी वर्ष जनवरी में दो दिवसीय हड़ताल की गई थी। इस बाबत प्रबंधकों तथा श्रमिक प्रतिनिधियों की 26 जून की मीटिंग भी हुई थी जो मालिकान को अड़ीयल रवैये के चलते असफल रही।
इस अवसर पर हुई श्रमिकों की सयुंक्त सभा को संबोधित करते हुए साथी विजय मिश्रा, अमरीक सिंह, जगतार सिंह कर्मपुरा, जीत राज, सुच्चा सिंह अजनाला, अमरजीत सिंह आसल ने घोषणा की कि माँगे न माने जाने की सूरत में 12-13 जुलाई को फिर से दो दिवसीय हड़ताल एवं व्यापक रोष प्रर्दशन किये जाएँगे।
अन्य वक्ताओं में बृहमदेव शर्मा, मोहन लाल, सुखवंत सिंह, नरेन्द्र चमियारी, बलविन्द्र सिंह शामिल थे।
रिपोर्ट : जगतार सिंह कर्मपुरा
पट्टी में बिजली कार्यालय के समक्ष किसान धरना
जम्हूरी किसान सभा जिला तरनतारन के आह्वान पर हरदीप सिंह बोपाराय की अध्यक्षता में बिजली कार्यालय पट्टी के समक्ष अनिश्चित-कालीन धरना-प्रर्दशन शुरू किया गया। धरने पर बैठे किसानों को संबोधित करते हुए निरपाल सिंह जौणेके तथा हरभजन सिंह चूसलेवड़ ने आरोप लगाया किबरवाला फीडर से विगत दो दिन से विद्युत आपूर्ती नहीं हो रही तथा अधिकारी गर्मी व प्यास से बिलबिलाते लोगों की तरफ से आँखें मूँद कर बैठे हुए हैं।
इस अवसर पर अमरजीत सिंह, रछपाल सिंह, जगतार सिंह, गुरविन्द्र सिंह, गुरजंट सिंह, जगरूप सिंह, कुलवंत सिंह, सतनाम सिंह, बीर सिंह इत्यादि भी उपस्थित थे।
पुलिस के विरुद्ध धरना
जम्हूरी किसान सभा द्वारा पुलिस उपायुक्त कार्यालय पट्टी के समक्ष साथी निर्पाल सिंह जौणेके तथा बलविन्द्र सिंह भिक्खीविंड सहित ग्यारह साथियों द्वारा अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की गई। भूख हड़ताली साथियों ने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारी स्थानीय लोगों की जायज शिकायतों पर कान नहीं धरते तथा दोषियों को संरक्षण देते हैं।
हरियाणा डायरी
हरियाणा में गरीब किसान की भूमि पर नाजायज कब्जे के विरुद्ध संघर्ष
हरियाणा के गाँव बोस्ती (जिला फतेहाबाद) में दबंगों द्वारा दलित भाईचारे से संबंधित पाँच महिलाओं तथा तीन पुरूषों पर नृशंस हमला कर उन्हें घायल कर दिया गया एवं इन गरीबों की भूमि पर जबरन कब्काा कर लिया गया। यह भूमि इन गरीबों को 1971 में राज्य सरकार द्वारा आवंटित की गई थी।
हमलावरों को प्राप्त राजनैतिक संरक्षण के चलते स्थानीय पुलिस द्वारा इन अपराधियों के विरूद्ध कारवाई करने की बजाय उक्त पीडि़त मजदूरों की ही धमकाया जाता रहा है ताकि वे दबाव में आकर समझौता करें तथा मूल्यवान भूमि यों ही छोड़ दें।
इस पक्षपात पूर्ण रवैये के विरूद्ध तथा दोषियों को कुकृत्य की सजा दिलवाने हेतु देहाती मजदूर सभा हरियाणा, निर्माण कामगार यूनियन हरियाणा तथा अन्य सहयोगी संगठनों द्वारा बिगत 19 जून की डी.सी. कार्यालय फतेहाबाद के समक्ष रोष प्रदर्शन कर धरना दिया गया।
धरना-प्रर्दशन का नेतृत्व साथी तेजिन्द्र सिंह थिंद, सुखचैन सिंह रताखेड़ा, राजेश कुमार चौबारा ने किया एवं जिला अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा गया।
इस अवसर पर हुई सभा को बलदेव सिंह मानकपुर, राजा राम रताखेड़ा, श्याम गोरखपुर, पर्मजीत सिंह लाली ने संबोधित किया।
वक्ताओं ने मजदूरों को उनकी भूमि दिलाने, दोषी दबंगों के विरूद्ध के पक्ष में काम करने वाले पुलिस तथा माल कर्मचारियों को सजाएँ देने की माँग की। माँगें न माने जाने की सूरत में और तीव्र संघर्ष करने की चेतावनी दी गई।
रिपोर्ट : सुखचैन सिंह
