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हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों की शानदार हड़ताल

हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों की शानदार हड़ताल

हरियाणा रोडवेज के कर्मचारी 16 अक्टूबर से हड़ताल पर हैं। आरंभ में 2 दिन हड़ताल करने का आह्वान रोडवेज कर्मचारियों की 7 यूनियनों द्वारा किया गया था। बाद में प्रांत की बी.जे.पी. की खट्टर सरकार की हठधर्मी व कर्मचारियों के विरुद्ध चलाये गये दमनचक्र का विरोध करते हुये पहले इसे 2-2 दिन बढ़ाया गया, बाद में तीन तीन दिन, इस तरह यह अभी तक जारी है। इस हड़ताल की मांग कर्मचारियों के तात्कालिक हितों से नहीं जुड़ी हुई है, बल्कि, यह प्रांतवासियों को यातायात की महत्त्वपूर्ण सेवा प्रदान करने वाले इस विभाग को बचाने से जुड़ी है।
इस हड़ताल को प्रदेश के सभी वर्गों का जन समर्थन मिल रहा है। शासक पार्टी बीजेपी को छोड़ लगभग सभी राजनीतिक पार्टियां जिनमें कांग्रेस, इनैलो, वामपंथी पार्टियां शामिल हैं, इसका समर्थन कर रही हैं। आरएमपीआई की हरियाणा शाखा के सचिव साथी तेजिंद्र सिंह थिंद तथा सी.टी.यू. पंजाब के अध्यक्ष व केंद्रीय कमेटी सदस्य इंद्रजीत सिंह ग्रेवाल भी हरियाणा रोडवेज के हड़ताली साथियों की जनसभाओं में पहुंचकर उनका समर्थन करके आये। हरियाणा राज्य के 2.5 लाख कर्मचारियों ने 30 व 31 अक्तूबर को दो दिन की सफल हड़ताल रोडवेज कर्मचारियों के समर्थन में की। अब 2 नवंबर तक यह बढ़ा दी गई है। इस तरह हरियाणा सरकार के शिक्षा, विद्युत, स्वास्थ्य, पी.डब्लयू.डी. लगभग सभी विभागों के कर्मचारी रोड़वेज कर्मचारियों के समर्थन में हड़ताल पर हैं।  समाचार पत्रों के अनुसार राज्य के समूचे विभागों के काम-काज पर इस हड़ताल का असर स्पष्ट दिखाई दिया। प्रदेश की जनता का व्यापक समर्थन मिलने के साथ साथ प्रदेश में बस सेवा दे रही सहिकारी समितियों ने भी इस हड़ताल का समर्थन किया है।
देश भर में परिवहन विभागों में कार्यरत व परिवहन सेवाओं से जुड़़े अन्य मजदूरों ने 7 अगस्त को केंद्रीय सरकार द्वारा बनाये गये ‘मोटर व्हीकल एक्टÓ के विरुद्ध हड़ताल की थी। जो कि हरियाणा रोडवेज में भी शत-प्रतिशत रही। इसके बाद कुछ यूनियनों जो कि उपरोक्त हड़ताल का हिस्सा नहीं थी ने राज्य सरकार द्वारा निजी क्षेत्र की 720 बसें किलोमीटर स्कीम में चलाने के निर्णय के विरुद्ध 5 सितंबर को हड़ताल की। यहां यह भी वर्णन योग्य है कि इस हड़ताल के लिये इन यूनियनों ने विभाग की बड़ी यूनियनों को विश्वास में नहीं लिया था। 5 सितंबर की यह हड़ताल पूर्ण रूप में सफल नहीं हो पाई। फिर भी राज्य सरकार ने दमनात्मक कार्यवाही करते हुये 300 के करीब कर्मचारियों को निलंबित कर दिया तथा उन पर एस्मा में मुकदमे दर्ज कर दिये। इससे समूचे रोडवेज कर्मियों में आक्रोश फैल गया। इस पृष्ठभूमि में विभाग की सभी यूनियनें एक मंच पर आ गईं तथा मौजूदा हड़ताल का आह्वान किया।
प्रदेश की भाजपा सरकार ने कुछ समय पहले नीतिगत निर्णय लेकर निजी कंपनियों की 720 बसें किलोमीटर स्कीम के तहत 34 रुपये से 41 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से लेने का निर्णय लिया है। इनमें बस का ड्राईवर तथा रख रखाव उस कंपनी की जिम्मेदारी होगी। सिर्फ कंडक्टर ही विभाग का होगा। यह बसें भी बड़ी निजी कंपनियों से ली जायेंगी जो कि कम-से-कम 5 बसें दे सकेंगी, एक कंपनी से 50 बसें तक ली जा सकेंगी। इस तरह यह स्कीम पूर्ण रूप से निजी परिवहन क्षेत्र के बड़े बस मालिकों के हित में है। दरअसल, यह रोडवेज के निजीकरण की ओर एक कदम है तथा प्रदेश के युवाओं को रोजगार देने वाले बड़े विभाग में रोजगार के अवसर समाप्त करने की ओर ले जाता है। इससे ड्राईवरों, वर्कशाप कर्मचारियों व अन्य संबंधित कर्मचारियों की जरूरत जो इन 720 बसों के अनुपात में है, उन पदों को विभाग से समाप्त कर दिया जायेगा। सरकार बार बार परिवहन सेवाओं के निजीकरण के प्रयत्न कर रही हैं। पहले भी खट्टर सरकार निजी बसों को परमिट देने की योजना लेकर आई थी जिसे रोडवेज कर्मचारियों के संघर्ष के दबाव में छोडऩा पड़ा था।
हरियाणा रोडवेज कर्मचारी यूनियनों का मांग है कि सरकार प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष ढंग से निजीकरण की जगह इस विभाग में बसों की संख्या बढ़ाये। इस समय प्रदेश में 4000 सरकारी बसें है जबकि प्रदेश की वर्तमान जरूरतों के अनुसार 18000 बसों की जरूरत है। हालत यह है कि अक्टूबर 2014 में सत्ता संभालने के बाद से खट्टर सरकार द्वारा 4 साल से विभाग में कोई भर्ती नहीं की गई। सिर्फ थोड़े से कर्मचारी जो कि या तो अप्रैंटिस हैं या फिर ठेके पर हैं, ही को भर्ती किया गया है। हर साल सैंकड़े बसें नकारा हो रही हैं तथा अच्छी खासी संख्या में बसें ड्राईवरों व कंडक्टरों की कमी के कारण डिपो में खड़ी हैं। यूनियनों के अनुसार यदि राज्य सरकार विभाग में तात्कालिक आवश्यकता को ध्यान रखते हुये 14000 बसें शामिल करती है उससे 84000 नौजवानों के लिये रोजगार पैदा होगा। जबकि निजी क्षेत्र में बसें चलाने पर कहीं कम मात्रा में रोजगार मिलेंगे वह भी कच्चे तथा सरकार को होने वाली आय का भी नुकसान होगा।
हरियाणा सरकार की ओर से रोडवेज कर्मियों पर भीषण दमन चक्र चलाया जा रहा है। रोडवेज कर्मियों की एटक, इंटक, ए.आर.टी.डब्लियू.एफ. से संबंधित यूनियनों के कार्यालय सील कर दिये गये हैं। 500 से अधिक कर्मियों को एस्मा व अन्य कानूनों के अधीन गिरफ्तार कर लिया गया है। 100 से अधिक कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। उसके बावजूद हरियाणा रोडवेज कर्मियों की यह हड़ताल ऐतिहासिक रूप में सफल बनी हुई है। इसे मिल रहे व्यापक जन समर्थन ने रोडवेज कर्मियों का मनोबल और ऊंचा किया है। रोडवेज कर्मी निश्चित रूप में सफलता हासिल करते हुए जहां बीजेपी सरकार की प्रांत के लोगों के टैक्सों से बनी इस धरोहर का चंद पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिये निजीकरण करने की साजिश को विफल करेंगे वहीं वे प्रदेश के आम लोगों के हितों के मद्देनजर उन्हें सस्ती व सुलभ यातायात सुविधायें प्रदान करने वाले विभाग, हरियाणा रोडवेज की भी रक्षा करने में सफल होंगे।
(31.10.2018)

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