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जन संघर्ष (संग्रामी लहर – दिसंबर २०१८)

जन संघर्ष (संग्रामी लहर – दिसंबर २०१८)

दिल्ली में किसानों का रोष पूर्ण विशाल प्रदर्शन

30 नवंबर सुबह लगभग 10:30 बजे तकऱीबन 50 हज़ार किसानों ने भारी सुरक्षा इंतज़ामों के बीच रामलीला मैदान से संसद भवन तक पैदल मार्च शुरू किया। इस भव्य व विशाल एकत्रता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने लगभग 3500 पुलिसकर्मियों को सुरक्षा इंतजाम के लिए तैनात किया था। इस दौरान मध्य दिल्ली स्थित रामलीला मैदान से संसद मार्ग तक विभिन्न इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ. पुलिस ने आंदोलनकारियों को सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए संसद मार्ग थाने से आगे बढऩे से रोक दिया। इसलिए, किसानों ने वहीं धरना लगा दिया। इस धरने को विभिन्न किसान संगठनों के नेताओं के अतिरिक्त बहुत से राजनीतिक नेताओं ने भी संबोधन किया।
इस किसान धरने में राकांपा के शरद पवार, आप संयोजक अरविंद केजरीवाल, माकपा के सीताराम येचुरी, तृणमूल कांग्रेस के दिनेश त्रिवेदी, नेशनल कांफ्रेस के फ़ारूक़ अब्दुल्ला, भाकपा नेता डी. राजा, भाकपा नेता एस. सुधाकर रेड्डी, आप सांसद संजय सिंह, सपा के धर्मेंद्र यादव, वरिष्ठ समाजवादी नेता शरद यादव सहित अन्य दलों के नेता भी मौजूद थे।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसे संबोधन करते हुये केंद्र सरकार पर किसानों के साथ धोख़ा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने 15 अमीर दोस्तों का साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये का का कज़ऱ् माफ़ कर सकते हैं तो करोड़ों किसानों का कज़ऱ् माफ़ करने में उनको परेशानी क्यों है। गांधी ने कहा कि सरकार से किसान तोहफ़ा नहीं अपना हक़ मांग रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने किसानों का कज़ऱ् पूरी तरह से माफ करने और फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिये कानून बनाने की मांग का समर्थन करते हुये कहा है कि किसानों की इस मांग के साथ विपक्ष के सभी दल एकजुट हैं। किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने ने कहा कि पिछले चुनाव के समय प्रधानमंत्री ने कहा था कि सही दाम दिलाएंगे, बोनस मिलेगा, न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाएंगे. लेकिन आज हालत यह है कि किसान को न तो फसल का सही दाम मिल रहा है और न ही कज़ऱ् माफ़ हो रहा है।’
भाकपा के राष्ट्रीय सचिव सुधाकर रेड्डी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा सरकार सबसे ज़्यादा किसान विरोधी सरकार है। उन्होंने कहा, ‘मोदी सरकार ने भूमि अधिग्रहण (संशोधन) विधेयक पारित करने की कोशिश की लेकिन विपक्षी दलों के विरोध के कारण विधेयक राज्यसभा में पारित नहीं हुआ। अगर भाजपा दोबारा जीत जाती है तो वह विवादित विधेयक को पारित करने के लिए क़दम उठाएगी।’
सीताराम येचुरी ने कहा, ‘यह वही पुलिस थाना (संसद मार्ग पुलिस थाना) है जहां विधानसभा में बम फेंकने के लिए भगत सिंह को हिरासत में लिया गया था।’ उन्होंने कहा, ‘हमारे पास वोटों की ताक़त है। अगर सरकार अपना रुख़ नहीं बदलती तो उसे सत्ता से बाहर कर दिया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश एकजुट है और हम अगले चुनावों में मोदी को हटा देंगे।’
तृणमूल कांग्रेस नेता दिनेश त्रिवेदी ने कहा, ‘भारत के किसान हमारे सामने खड़े हैं और यह भारत का अभियान है। किसानों का संकल्प मजबूत हैं और वह सब कुछ हासिल कर सकते हैं।’
राकांपा प्रमुख शरद पवार ने कहा कि देश में किसानों की स्थिति बदलने की ज़रूरत है लेकिन सरकार उनकी दुर्दशा की ओर सहानुभूति नहीं दिखा रही है।
आप के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कृषि उपज मूल्य के निर्धारण से सबंधित स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करने से मोदी सरकार के मुकरने को किसानों के साथ धोख़ा बताते हुये कहा है कि सरकार ने किसानों की पीठ में छुरा घोंपा है। केजरीवाल ने किसान सभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘मोदी सरकार ने उच्चतम न्यायालय में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू नहीं करने का हलफऩामा पेश किया है। यह किसानों के साथ सबसे बड़ा धोखा है। सरकार के पास अभी भी पांच महीने का समय है। सरकार इस हलफऩामे को वापस लेकर स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करे वरना किसान 2019 में कयामत ढा देंगे।’ उन्होंने किसानों के संकट के लिए कज़ऱ्, फसल मूल्य और फसल की सुरक्षा को सबसे बड़ा कारण बताया।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं ने शुक्रवार को केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उसने पिछले साढ़े चार साल में किसानों के लिए एक भी बड़ी पहल लागू नहीं की तथा नोटबंदी से देश में कृषि संकट और गहरा गया।
किसानों की इस रैली को संबोधित करते हुए नर्मदा बचाओ आंदोलन की कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने आरोप लगाया, ‘सरकार शुरुआत से ही कॉरपोरेट समर्थक नीतियां लागू कर रही हैं और उसने किसानों के लिए एक भी बड़ा क़दम नहीं उठाया। भाजपा सरकार का मक़सद किसानों, आदिवासियों की ज़मीन उद्योगपतियों के हाथों में देने का है।’
अखिल भारतीय किसान महासभा (एआईकेएम) के महासचिव राजाराम सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार ने नोटबंदी के ज़रिये काले धन को सफेद धन में बदलने की कोशिश की। उन्होंने कहा, ‘नोटबंदी का असर देशभर के किसानों पर पड़ा है।’
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के नेता योगेंद्र यादव ने कहा है कि किसानों ने कृषि संकट के स्थायी समाधान के लिए पहली बार सरकार के समक्ष समस्या के समाधान का मसौदा पेश किया है। किसान चार्टर और किसान घोषणा पत्र के रूप में इस मसौदे को शुक्रवार को संसद मार्ग पर आयोजित किसान सभा में पेश किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि किसानों ने पहली बार कानून का मसौदा बना कर सरकार के समक्ष पेश किया है। किसानों को कज़ऱ् से मुक्ति दिलाने और कृषि उपज की लागत का डेढ़ गुनी कीमत दिलाने से जुड़े प्रस्तावित दो विधेयक संसद में लंबित हैं। इन्हें पारित कराने के लिए किसानों ने सरकार से संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग को लेकर यह आंदोलन किया है। यादव ने कहा कि पहला अवसर है जब किसानों ने अपने झंडों को एक कर लिया है. इसलिये यह आंदोलन निर्णायक साबित होगा।
किसान यात्रा में शामिल वरिष्ठ पत्रकार पी. साईनाथ ने इस आंदोलन को निर्णायक बताते हुए कहा, ‘इस बार मज़दूर और किसान अकेला नहीं है. डॉक्टर, वकील, छात्र और पेशेवर पहली बार अपनी ड्यूटी छोडक़र किसानों के साथ आए हैं।’ उन्होंने कहा कि इस बार आंदोलनकारी दोनों प्रस्तावित विधेयकों को पारित करने की मांग से पीछे नहीं हटेंगे।  

फतेहाबाद में किसान पंचायत  
किसान संघर्ष समिति हरियाणा संबंधित जम्हूरी किसान सभा पंजाब द्वारा धान की पराली की समस्या को लेकर किसान पंचायत नई सब्जी मंडी फतेहाबाद में आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता जिला कन्वीनर मनफूल ढाका, बाबा बच्चन सिंह ने संयुक्त रूप से की। मंच संचालन मनदीप नथवान ने किया। इस पंचायत में जिले भर से किसानों ने भाग लिया।
जम्हूरी किसान सभा के राज्य महासचिव कुलवंत संधू ने इसे संबोधित करते हुए कहा कि धान की पराली का समाधान सरकार को करना चाहिए, वह धान की पराली का समाधान किए बगैर किसानों के ऊपर दबाव की नीति बना रही है। लगातार किसान विरोधी नीतियों को लागू किया जा रहा है। खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा बन चुकी है। सरकार लगातार नवउदारवादी नीतियों पर चलते किसानों को तबाह करने पर तुली हुई है। आज धान की पराली का समाधान किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या बन गया है। किसान भी नहीं चाहता प्रदूषण हो मगर किसान की मजबूरी है, आग लगाना। क्योंकि सरकार ने कोई इसका उचित प्रबंध नहीं किया है। आज किसान गेहूं की बुआई को लेकर काफी परेशान है। हरियाणा के किसानों की तरह ही पंजाब के किसानों की भी यही समस्या है। हम किसानों को मिलकर लडऩा होगा। किसानों पर किसी भी प्रकार के जुर्माने लगाए गये तो पंजाब के किसान भी हरियाणा के किसानों का समर्थन करेंगे। 29 और 30 नवंबर को दिल्ली में कर्जा मुक्ति की मांग को लेकर व स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करवाने की मांग को लेकर देश के हजारों किसान दिल्ली की तरफ कूच करेंगे। उन्होंने हरियाणा के किसानों को भी दिल्ली प्रदर्शन में बढ़-चढक़र भाग लेने का न्योता दिया।
इस किसान पंचायत को मनफूल ढाका ने संबोधित करते हुए कहा किसानों को संगठित होकर अपनी लड़ाई लडऩी होगी। इस पंचायत में रविंदर हजरा खुर्द, हरनाम चांद अली, मलकीत रंधावा, अजय जाजड़ा, देहाती मजदूर सभा के जिला सचिव सुखचैन रत्ता खेड़ा, जन चेतना मंच के मास्टर बृजपाल जाखल, नवजीत,  दिलबाग, गुरमेज, एमपी सोत्तर, सुखदेव सिंह, ओम प्रकाश, सतनाम सिंह हजरावा कलां, पाल सिंह रतिया, कृष्ण स्वरूप सिंह खोखर, रमेश कंबोज, दरबार सिंह, तजिंदर सिंह आदि हाजिर थे। रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल का किसान संघर्ष समिति ने पूर्ण रूप से समर्थन किया। 30 से ज्यादा गांवों के लोगों ने इस किसान पंचायत का समर्थन किया।

किसान संघर्ष समिति द्वारा प्रदर्शन
किसान संघर्ष समिति, संबंधित जम्हूरी किसान सभा, की जिला फतेहाबाद कमेटी द्वारा हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का पुतला जलाया गया। इस प्रदर्शन की अध्यक्षता पतराम ढाणी ईसर ने की। इसे संबोधन करते हुऐ किसान नेता मनदीप नथवान ने कहा कि हरियाणा सरकार लगातार किसान विरोधी नीतियां लागू कर रही है। पराली  के नाम पर जबरन किसानों को जुर्माने के नोटिस भेजे गये जिसमें कोर्ट का हवाला दिया गया है। जबकि कोर्ट ने प्रदूषण को रोकने के लिये सरकार को किसानों की मदद करने के लिए कहा था मगर सरकार द्वारा एक तरफा कार्रवाई की जा रही है। फतेहाबाद उपायुक्त किसानों के खिलाफ  लगातार फरमान जारी कर  रहा है। कुछ दिन पहले सरपंचों को सस्पेंड किया गया क्योंकि उन्हें जिम्मेदार माना गया आग लगाने के लिए। आज अनाज मंडी में किसानों की लूट हो रही है सरकारी खरीद बंद की जा रही है, इसकी जिम्मेदारी उपायुक्त की बनती है। अंग्रेज राज की तरह हुक्म सुनाने का काम किया जा रहा है और किसानों को ही दोषी ठहराया जा रहा है। सब्सिडी के नाम पर बहुत बड़ा घपला किसानों के साथ किया गया, सब्सिडी भी चंद किसानों को दी जाती है जो बड़े व धनी किसान हैं। छोटा व सीमांत किसान चक्कर काट कर  खाली हाथ लौट जाता है। किसान संघर्ष समिति  गांवों में जनसंपर्क अभियान चलाएगी और किसान विरोधी बयान देने वाले अफसरों के खिलाफ भी मोर्चा खोलेगी।
उन्होंने बताया कि समिति 29-30 नवंबर को दिल्ली किसान मार्च में भी भाग लेंगी। हर गांव में किसान संघर्ष समिति अपनी कमेटियां बनायेंगी। भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ लामबंदी करेंगी। घग्घर नदी में दूषित पानी लगातार बह रहा है, 8 सालों के बाद आज मात्र सैंपल लेकर संतुष्ट किया जा रहा है। फैक्ट्रियों के खिलाफ प्रदूषण को लेकर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती उपायुक्त महोदय किसानों के खिलाफ ही कार्रवाई करने के बयान सोशल मीडिया पर दे रहे हैं। किसानों की सब्सिडी बंद करने की धमकी कहां तक उचित है। किसान भी आग नहीं लगाना चाहता इसके लिए प्रशासन जिम्मेदार है। किसान संघर्ष समिति किसानों की समस्याओं को लगातार उठाएगी। बिना संसाधन उपलब्ध कराएं यदि प्रशासन ने  किसानों के खिलाफ  कार्रवाई की तो संघर्ष का रास्ता अपनाया जायेगा।
इस प्रदर्शन में मनफूल ढाका, मनदीप नथवान, मलकीत रंधावा, रविंद्र हजरांवा खुर्द, सुखदेव, औमप्रकाश, हरनाम अलीसदर, नवजीत, गुरप्रीत भूंदडवास, निर्भय रतिया, सुखचैन रताख़ेडा हाजिर थे।  

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शहीद भगत सिंह नौजवान सभा द्वारा घग्गर नदी के प्रदूषण के मुद्दे पर प्रदर्शन
शहीद भगत सिंह नौजवान सभा पंजाब-हरियाणा, तहसील कमेटी रतिया द्वारा घग्गर नदी के प्रदूषित पानी की समस्या को लोगों के समक्ष उभारने के लिये हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का पुतला घग्गर नदी में लटका दिया। पराली को आग लगाने से प्रदूषण होता है, फतेहाबाद का उपायुक्त प्रदूषण के खिलाफ किसानों पर कार्रवाई करता है। जबकि घग्गर नदी में दूषित पानी डालने वाली फैक्ट्रियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करता। क्योंकि यह फैक्ट्रियां राजनेताओं के करीबियों की है। और इन फैक्ट्रियों के चंदे से सत्ताधारी पार्टियां चुनाव लड़ती हैं। इसीलिए कोई भी पक्ष, सत्ता पक्ष या विपक्ष इन फैक्ट्रियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं चाहता। शहीद भगत सिंह नौजवान सभा पिछले 5 सालों से लगातार प्रदूषण पानी की समस्या को लेकर संघर्ष करती आ रही है। और इन 5 सालों में सरकार द्वारा मात्र पानी के सैंपल ही लिए जा रहे हैं व लोगों को यह भरोसा दिलवाया जा रहा है कि जल्द समस्या का समाधान हो जाएगा मगर सच्चाई कुछ और है। घग्गर नदी के दूषित पानी ने कई लोगों की जान ले ली है। हेपेटाइटिस-सी, कैंसर जैसी बिमारियों ने हमारे क्षेत्र को घेर लिया है। परंतु यह सरकार विकास के दावे और ईमानदार होने का दम भर रही है। यह कैसा विकास हो रहा है, ना रोजगार है, ना शिक्षा है, ना स्वास्थ्य की कोई चिंता है। इससे स्पष्ट हो जाता कि भाजपा सरकार जनविरोधी सरकार है। और कांग्रेसी इस बात का इंतजार कर रही है जितना यह लोगों को परेशान करेंगे उतना ही हमें फायदा होगा और हम सत्ता में आ जाएंगे। इन मौकापरस्त पार्टियों के खिलाफ भी शहीद भगत सिंह नौजवान सभा लोगों में जागृति पैदा करेगी। मौजूदा एमएलए तथा ना ही चुनाव हारे हुए लोग, लोगों की सुध ले रहे हैं तथा इन तमाम मौकापरस्त लोगों के खिलाफ भी शहीद भगत सिंह नौजवान सभा व्यापक आंदोलन चलायेगी और आने वाले समय में जब यह लोग वोट के लिए जनता के बीच में आएंगे तो इन्हें सवाल-जवाब जरूर किए जाएंगे। प्रदूषण के नाम पर फतेहाबाद जिले के दो सरपंच और एक नंबरदार को सरकार ने सस्पेंड किया है। इस प्रदूषित पानी के लिए भी जिम्मेदार अधिकारियों को सस्पेंड करना चाहिए, जो लोगों की जान ले रहे हैं उन पर भी उचित कार्रवाई होनी चाहिए यह जिले के प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है। प्रशासन की मिलीभगत से नशा बिक रहा है। स्कूलों में अध्यापक नहीं है। सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों व मशीनों का अभाव है। इसकी ओर सरकार का कोई ध्यान नहीं है। अंग्रेज राज की तरह फतेहाबाद उपायुक्त किसानों के खिलाफ फरमान सुना रहा है। शहीद भगत सिंह नौजवान सभा इसकी कड़े शब्दों में निंदा करती है, यह लोकतंत्र है राजतंत्र नहीं है। डीसी साहब लोगों ने सरकार को चुना है इसलिये सरकार लोगों पर तानाशाही नीति नहीं अपना सकती है अंग्रेजी हुकूमत में कभी सूरज नहीं छिपता था लडऩे वाले लोगों ने यह सिद्ध कर दिया, तानाशाह कहलाने वाले ज्यादा दिन तक नहीं टिक सकते। नौजवान सभा तमाम देशभक्त लोगों से अपील करती है कि लोगों की तमाम समस्याओं को देखते हुए हमारे क्षेत्र में जो बुराइयां हैं उनके खिलाफ हमें एकजुटता के साथ संघर्ष करना होगा। यहां पर राज चाहे किसी भी पार्टी का हो इनका आम जनता से कोई लेना देना नहीं होता। आओ मिलकर हम घग्घर नदी को प्रदूषण मुक्त करेंगे और इसकी जिम्मेदार सरकार व प्रशासन को घेरने का काम करेंगे। राज्य प्रधान मनदीप नथवान, जिला सहसचिव निर्भय, तहसील सचिव मनजीत अलिका, मलकीत रतिया, किसान संघर्ष समिति के मलकीत रंधावा, हरियाणा छात्र फैडरेशन के गुरदीप खोखर, रमन शर्मा काला रतिया, आर.अम. पी.आई. के तहसील सचिव सुरजीत रतिया इस समय हाजिर थे।  

‘जन-जन जगाओ-लुटेरे भगाओ’ जत्था मार्च सफलता सहित संपन्न
भारतीय क्रांतिकारी माक्र्सवादी पार्टी (आर. एम. पी. आई.) की पंजाब राज्य समिति की ओर से 12 से 21 नवंबर तक राज्य के सभी जिलों में दो अलग-अलग जत्था मार्चों द्वारा घनी जनसम्पर्क मुहिम चलाई गई। इनमें से एक जत्थे का नेतृत्व पार्टी के महासचिव साथी मंगत राम पासला और दूसरे का पार्टी के केंद्रीय समिति सदस्य साथी गुरनाम सिंह दाऊद द्वारा किया गया। साम्राज्यवाद के खि़लाफ़ देशभक्त संग्राम की शानदार जीत तथा भारतीय आवाम के सांप्रदायिक सदभाव के प्रतीक जलियांवाला बाग़, अमृतसर से यह जत्थे चलाऐ गए। ‘‘भारत के मेहनतकशों’’ की हर किस्म की लूट-खसूट से मुक्ति के संग्राम की सफलता के लिए लोगों को हर त्याग करने के लिए तैयार होने का आह्वान करना इस जगह का चयन करने के पीछे पार्टी का दूसरा बड़ा उद्देश्य था। लोगों को वर्ग चेतना के साथ लैस करके, सभी मतभेद भुला कर एक करने, निर्णायक संग्रामों के निर्माण के लिए मैदान में आने का संदेश देने के लिए इस जनसंपर्क अभियान का नाम ‘‘जन-जन जगाओ-लुटेरे भगाओ जत्था मार्च’’ रखा था। साथी पासला के नेतृत्व वाले मार्च ने माझे- दोआबे के समूचे जिलों के अतिरिक्त रोपड़, मोहाली आदि में लोगों के साथ विचार चर्चा की। जबकि साथी दाऊद के नेतृत्व वाले दूसरे जत्थे ने समूचे मालवा क्षेत्र और तरन तारन जि़लों की मेहनतकश जनता के दुखों-दर्दों की बात छेड़ते हुए भविष्य के संग्रामों को मजबूत करने का आह्वान किया।
दोनों जत्थों के साथ चलने वाले वाहनों को विश्व व भारत की कामगार श्रेणी के नेताओं की तस्वीरों, लोगों की माँगों- उमंगों की पूर्ति के कथनों वाले फलैक्सों व लोगों की मुसीबतों के लिए जिम्मेवार साम्राज्यवाद व उनके भागीदार भारतीय सत्ताधारियों को चिन्हित करती फलैकसों के साथ सजाया गया था। इस इंकलाबी सजावट का एक अन्य विशेष पक्ष था, साम्यवादी आंदोलन की स्थापना से भी पहले काल के भारतीय, विशेषकर पंजाबी मेहनतकश वर्गों की ओर से लड़े गए निर्णायक और युग पलटाऊ संग्रामों के नायकों की तस्वीरें भी पहली बार साम्यवादी प्रचार विधि का अविभाजित भाग बनीं थी। वक्ताओं ने भी इन योद्धाओं का बड़े सम्मान के साथ जि़क्र किया। भारतीय उप महाद्वीप ख़ास कर भारत के लिए सामाजिक कोढ़ व पार्टी द्वारा चिन्हित रूढ़ीवादी ‘‘मनुवादी’’ व ‘‘पैतृसत्तावादी’’ वैचारिक धारा के निष्कर्ष के तौर पर भारतीय सर्वहारा वर्ग के बड़े और अहम हिस्से दलितों और मेहनतकश वर्ग की आधी आबादी औरतों के खि़लाफ़ होते अकथनीय और असह्य ज़ुल्मों का विवरण देते और इन ज़ुल्मों के ख़ात्मे के लिए ऐतिहासिक संग्रामों के निर्माण का आह्वान करते नारे भी इस क्रांतिकारी सजावट में शामिल थे। दोनों जत्थों का नेतृत्व कर रहे साथी पासला व साथी दाऊद की तरफ से 52 बड़ी स्थानीय सभायें जलसों और अनेकों छोटी सडक़ जनसभायें (गाँव व कस्बे स्तर की) को मुखातिब होकर जनसम्पर्क मुहिम का उद्देश्य, महत्व और आवश्यकता लोगों के सम्मुख बयान की गई। वैसे वाहनों पर बजते स्पीकरों के द्वारा दोनों जत्था मार्चों के सभी मार्गों से गुजऱते लोगों तक जत्था मार्च के उद्देश्य का बड़े पैमाने पर प्रचार किया गया।  
साथी पासला व दाऊद के अतिरिक्त पार्टी की पंजाब राज्य समिति के अध्यक्ष साथी रत्न सिंह रंधावा, सचिव साथी हरकंवल सिंह, वित्त सचिव साथी लाल चंद कटारूचक्क, रघबीर सिंह पकीवां, कुलवंत सिंह संधू, महीपाल, इन्द्रजीत सिंह ग्रेवाल, सज्जन सिंह बैंस (सभी केंद्रीय समिति सदस्य), भीम सिंह आलमपुर, डाक्टर सतनाम सिंह अजनाला, प्रगट सिंह जामाराए, रवि कँवर, वेद प्रकाश (सभी राज्य सचिवालय के सदस्य) और राज्य समिति सदस्यों की तरफ से उपरोक्त जन सभायें को संबोधन किया गया।
पार्टी की तरफ से छापी गई एक ‘‘पैंफलेट’’भी इन जनसभाओंं के दौरान लोगों तक पढऩे के लिए पहुँचाई गई। इस पैंफलेट द्वारा देश के मेहनतकशों की दयनीय हालत, इस हालत के लिए जि़म्मेदार साम्राज्यवाद के साथ घी-खिचड़ी भारतीय सत्ताधारियों की नीतियाँ और इस स्थिति में सकारात्मक मोड़ लाने वाले संग्रामों के बारे में सादे पर प्रभावशाली ढंग के साथ रौशनी डाली गई। सभी जगह झंडे-बैनरोंं के साथ लैस दुपहिया वाहनों के ख़ूबसूरत काफि़लों ने जत्था मार्चों का शानदार नेतृत्व किया। कई कमियों के बावजूद ‘‘जन-जन जगाओ-लुटेरे भगाओ’’ अभियान ने बड़ी भविष्यमुखी ठोस उप्लब्धियों की और शानदार परंपरायें डालीं हैं। सामाजिक परिवर्तन के लिये भविष्य के संग्राम को जीत तक ले जाने के लिए पार्टी की तरफ से इन परंपराओं को और मज़बूत करने और इनका विस्तार करने के लिए प्रयत्न करने होंगे।
इस अभियान का सब से उत्साहवद्र्धक पक्ष यह रहा कि इस में बुनियादी वर्गों अर्थात भूमिहीन, दलितों और गरीब किसानों ने न केवल बहुत बड़ी संख्या में शिरकत की बल्कि वक्ताओं के विचारों को ध्यान से सुनकर आत्मसात करने का प्रयत्न किया। यह भी समय का एक ख़ूबसूरत ऐतिहासिक पड़ाव ही समझना चाहिए कि इस मुहिम में औरतें, ख़ास कर श्रमिक परिवारों की स्थानीय और प्रवासी औरतों ने बड़ी संख्या में शिरकत की। कुछ एक सभाओं का प्रभाव तो यह जाता था जैसे यह केवल औरतों की सभाएं हों।
छ्व नौजवानों की इस अभियान में शमूलियत ने एक स्वस्थ संकेत दिया है कि नौजवान एक बार फिर (कहीं अधिक-कहीं कम) साम्यवादी संग्रामों और अभियानों से ओर आकर्षित होने लगे हैं। कुछ स्थानों पर तो नौजवानों की सभाओं में संख्या आधे से भी ज्यादा नजऱ में पड़ी।
छ्व शहरी सभाऐंंं ख़ास कर जालंधर, पठानकोट, सुलतानपुर लोधी, सुजानपुर आदि में प्रवासी मेहनतकशों (औरतें और मर्द दोनों) की हाजिऱी ने मुहिम को नया स्वरूप दिया।
छ्व इन सभाओं का एक ओर उजला पक्ष यह भी रहा कि सभी स्थानों पर समाज के संघर्षशील लोगों ने पहुंच कर अभियान को शक्तिशाली किया।
छ्व इस मुहिम ने एक बार फिर इस शाश्वत सत्य को उभार कर पेश किया कि जिस संगठन पर लोग भरोसा कर लें, बल्कि यह कहना ज़्यादा वाजिब होगा कि जो संगठन लोगों का भरोसा जीत ले, लोग उस के पास साधनों की कमी नहीं रहने देते। इस मुहिम का नेतृत्व कर रहे नेताओं ने जब लोगों को कहा कि प्रचार मुहिम और पार्टी को ओर तगड़ा करने के लिए श्रमिकों-किसानों-मेहनतकशों से आर्थिक सहायता चाहिए तो गरीब व तंगियों से ग्रस्त लोगों ने कोई कमी बाकी नहीं रहने दी। मुहिम का लगभग सारा खर्चा सभाओं में ‘‘पहुँचने’’ वाले भाई लालो ने पूरा कर दिया। इस मुहिम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जन-उगराही पार्टी निर्माण का सब से बड़ा साधन है।
छ्व पार्टी की तरफ से पंजाब के जुझारू और जन हितैषी विरासत को साथ लेकर आगे बढऩे के उचित फ़ैसले पर अमल करते हुये जब अपने भाषणों में यह गौरवशाली गाथाएं छूईं गई तो श्रोताओं की ओर से बड़े स्थानों पर जयकारे छुड़ाए गए जो साम्यवादी सक्रियता में जुड़ा नया, अलग सकारात्मक व्यवहार समझा जाना चाहिए।
छ्व संगरूर जि़ले की वाल्मीकि नौजवान सभा की ओर से गाँव आलमपुर में साथी गुरनाम सिंह का लोई के साथ सम्मान करना और मुक्तसर में अम्बेडकरवादी संगठनों की ओर से सभाओं में भाग लेना भी इस मुहिम की अच्छी उपलब्धि कहलवाने की हकदार है।
छ्व लोगों की मनोदशा की इबारत पढऩे पर यह बात उभर कर सामने आई कि लोग राष्ट्रीय स्तर पर मोदी एंड कंपनी और प्रांतीय स्तर पर बादलों से बहुत दुखी हैं। प्रांत की कांग्रेस सरकार की तरफ से मतदान के दौरान किये गए वादों से पूरी तरह पीठ कर लेने से भी वे गुस्से में हैं। मुहिम दौरान हुये सभाओं-जलसों में नेताओं द्वारा पार्टी की ओर से निश्चित गए अगले महत्वपूर्ण कार्य, 10 दिसंबर को जालंधर में की जा रही ‘‘विशाल अधिकार रैली’’ में बड़ी संख्या में परिवारों समेत पहुँचने का न्योता भी बड़े स्तर पर लोगों को दिया गया। यह स्पष्ट किया गया कि पार्टी की उपरोक्त रैली पूँजीपति लुटेरे वर्गों की लुटेरा पार्टियों की रैली जैसी नहीं होगी। इस रैली में मेहनतकश लोगों को ख़ुद अपने एकत्रित किये पैसों के द्वारा किये साधनों के ज़रिये अपना ही तैयार किया भोजन ले कर पहुँचना होगा। लोगों के व्यवहार से लगता है कि यह रैली बेमिसाल रूप में सफल होगी।
परन्तु समूचित रूप में यह कहने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए कि प्रतिक्रियावादी और अवैज्ञानिक विचारों की जंजीरों से लोगों को मुक्त करने, धर्म, जाति, भाषा, इलाके आदि के अलगाववादी रूझानों में से निकाल कर वर्गीय आधार पर संगठित करने, वास्तविक दुश्मन को चिन्हित करने के योग्य होते संघर्षों के द्वारा लूट के शासन को समाप्त करने के लिए अभी पार्टी और समूचे वाम आंदोलन को और ज्यादा सहृदय, परिपक्कव, ठोस, दृढ़ प्रयत्नों की बहुत बड़ी ज़रूरत है। इस रास्ते पर चलते किसी भी बलिदान से पीछे न हटने वाली नेतृत्व टीम और काडर तैयार करना भविष्य की सबसे बड़ी ज़रूरत है।
केंद्र की मोदी सरकार और पंजाब की कांग्रेसी सरकार की जन-विरोधी नीतियों के विरुद्ध मेहनतकश जनसमूहों को जागरूक और संगठित करने के लिए भारतीय क्रांतिकारी माक्र्सवादी पार्टी (आर.एम.पी.आई.) की तरफ से जलियांवाला बाग़ से दो जत्थे भेज कर ‘‘जन-जन जगाओ-लुटेरे भगाओ’’ जत्था मार्च का आरंभ किया गया। इन दोनों जत्थों ने 10 दिन प्रांत के हर कोने में, पठानकोट से खुइयां सरवर (फाजिल्का) तक और भिंडी सैदां (अजनाला) से मोहाली तक जा कर लोगों को मौजूदा सरकारों की रोजग़ार और खेती को तबाह करने वाली और महँगाई बढ़ाकर पूंजीपतियों की तिजोरियां भरने वाली जन विरोधी और देशद्रोही नीतियों के विरुद्ध और संघ परिवार के सांप्रदायिक फाशीवादी एजंडे के विरुद्ध जन-संघर्षों के मैदान संभालने का आह्वान किया।

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