शिव अमरोही
हमारे देश में 1990 से चालू की गई नव-उदारवाद की नीतियों के अंतर्गत किसान, मकादूर, कर्मचारी, छोटे दुकानदार सभी दु:खी हैं। इन नीतियों ने गरीबों तथा मेहनतकश लोगों का कचूमर निकाल दिया है जबकि अमीर और अधिक अमीर होते जा रहे हैं। लोगों की सेवा का अवसर माँगने वाले हमारे सांसद व विधायक वेतन व भत्तों के नाम पर मोटी रकमें प्राप्त कर रहे हैं। सूचना अधिकार कानून के अंतर्गत मध्यप्रदेश के नीमच शहर के रहने वाले चंद्रशेखर गौड़ द्वारा प्राप्त सूचना के अनुसार 2014-15 से लेकर 2017-18 तक यानि चार वर्षों में लोक सभा तथा राज्यसभा के सांसदों को 19.97 अरब के वेतन भत्ते दिए गए हैं इनसे लोकसभा सदस्यों को लगभग 15.54 अरब (1554 करोड़) तथा राज्यसभा सदस्यों को 4.43 अरब (443 करोड़) रु. वेतन तथा भत्तों के रूप में दिए गए हैं। इस प्रकार औसतन प्रतिवर्ष प्रति लोक सभा सदस्य 71.29 लाख रु. तथा राज्यसभा सदस्य 44.33 लाख रु. वेतन भत्तों के रूप में आवंटित किए गए हैं। हृड्डह्लद्बशठ्ठड्डद्य क्कशह्म्ह्लड्डद्य शद्घ ढ्ढठ्ठस्रद्बड्ड की ह्यद्बह्लद्ग जो द्बठ्ठस्रद्बड्ड.द्दश1.द्बठ्ठ है के अनुसार सांसदों का वेतन व भत्ते जो अप्रैल 2018 से संशोधित करके लिखे गए हैं; सांसदों का वेतन एक लाख रु. प्रति महीना, चुनाव क्षेत्र (ष्टशठ्ठह्यह्लद्बह्लह्वद्गठ्ठष्4) भत्ता 70,000/- (सत्तर हकाार रु.) प्रति महीना, स्टेशनरी तथा कार्यालय भत्ता 60,000/- (साठ हजार रु.) प्रति महीना, दैनिक भत्ता 2000/- प्रतिदिन बताया गया है। इसके अतिरिक्त फर्नीचर के लिए एक लाख रु. (प्रति पांच वर्ष) दिए जाने का प्रावधान है। सोफा, पर्दे तथा अन्य धुलाई योग्य वस्त्रों के लिए तीन महीने बाद भारी भरकम धुलाई भत्ता भी दिया जाता है। देश में कहीं भी जाने के लिए किसी भी ट्रेन में वातानुकूलित प्रथम श्रेणी या एक्जीक्यूटिव श्रेणी में यात्रा करने की सुविधा प्राप्त है। यह सुविधा सांसद की पत्नी/पति को भी दी गई है साथ ही द्वितीय वातानूकूलित श्रेणी में सांसद का एक सहायक भी साथ जा सकता है। इसी प्रकार देशभर में सांसद अपनी पत्नी/पति या किसी रिश्तेदार के साथ 34 हवाई यात्रा देश के किसी भी कोने तक यात्रा कर सकता है। सांसद का जीवन साथी उससे मिलने के लिए 8 हवाई यात्रा कर सकता है। सडक़ रास्ते से यात्रा के लिए सांसद को 16 रु. प्रति किलोमीटर की दर से यात्रा भत्ता मिलता है।
प्रत्येक सांसद को प्रति वर्ष चार लाख लीटर पानी तथा पचास हकाार यूनिट बिजली सप्लाई फ्री होती है। यदि किसी वर्ष में इस सुविधा का पूरा प्रयोग नहीं कर पाते तो बाकी का प्रयोग अगले वर्ष में कर सकते हैं। यदि पति-पत्नी दोनों सांसद हैं और एक ही फ्लैट/बंगले में रहते हैं तो दोनों को मिल रही पानी बिजली की सुविधा जोडक़र अर्थात दुगुनी हो जाएगी।
सांसदों को, वे सभी स्वास्थ्य सम्बन्धी सुविधाएं मिलती हैं जो सैंट्रल सिविल सेवा के क्लास-ढ्ढ अधिकारी को मिलती हैं।
वाहन खरीद के लिए सरकार की ओर से चार लाख रु. का ब्याज मुक्त भुगतान किया जाता है।
सांसदों को मिलने वाला वेतन भत्ते तथा सुविधाएं आयकर से मुक्त हैं।
लोकसभा चुनाव के तुरन्त बाद नव-निर्वाचित सांसदों के लिए सभी सुविधाओं सहित राज्य सरकार के नई दिल्ली स्थित गैस्ट हाऊस, होटल या भवन में रहने की व्यवस्था की जाती है। इसके बाद उनकी सपरिवार रहने की व्यवस्था किसी बंगले, होस्टल या फ्लैट में करवाई जाती है जिसका किराया सरकार, अवासीय भत्ते के अंतर्गत अदा करती है।
इसके अतिरिक्त सांसदों को मिल रही सांसद निधि अपने क्षेत्र में खर्च करने/विकास हेतु देने का अधिकार है। सरकारी कामकाज हेतु विदेशी दौरे पर जाने पर, उनकी सुरक्षा पर अनेक प्रकार के खर्च भी सरकार उन पर करती है। सांसदों को अनेक विशेषाधिकार भी प्राप्त हैं।
सांसद यदि एक दिन के लिए सांसद रहता है तो सांसद न रहने पर उसे पच्चीस हजार रु. पैंशन मिलती है। पांच साल से अधिक समय तक सांसद रहने पर उसे प्रत्येक अतिरिक्त वर्ष (9 महीने या इससे अधिक का समय पूरा वर्ष माना जाएगा) के लिए दो हजार रु. प्रति मास की दर से अतिरिक्त पैंशन दी जाएगी। यदि कोई व्यक्ति सांसद के अतिरिक्त राज्यपाल, विधायक, राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति या ऐसे ही किसी अन्य पद पर रह चुका हो तो इन सब की मिलने वाली पैंशन के साथ ही सांसद के तौर पर की गई सेवा के बदले में मिलने वाली पैंशन भी मिलती रहेगी। भूतपूर्व सांसद की मृत्यु के बाद उनके आश्रितों को 50′ पैंशन मिलती रहेगी। इसके अतिरिक्त भूतपूर्व सांसदों को रेल में वातानुकूलित प्रथम श्रेणी में या अपने सहयोगी के साथ वातानुकूलित द्वितीय श्रेणी टू टीयर में देश भर में कहीं भी किसी भी ट्रेन में यात्रा का अधिकार है। इसी प्रकार जो स्वास्थ्य सुविधाएं एक सांसद को मिलती हैं वही सुविधाएं भूतपूर्व सांसद को भी मिलती रहती हैं। इसी प्रकार भूतपूर्व सांसद अपनी पत्नी/पति के लिए एक्स एम.पी. स्पाउज कार्ड बनवाकर अपने जीवन साथी के लिए मिल रही विशेष सुविधाएं प्राप्त कर सकता है।
पार्लियामेेंट में वित्त मंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुसार अब सांसदों के वेतन व भत्तों में बढ़ौतरी ्रह्वह्लश रूशस्रद्ग पर डाल दी गई है जिससे प्रत्येक पांच वर्षों के बाद मुद्राअवमूल्यन सूंचकांक (द्बठ्ठद्घद्यड्डह्लद्बशठ्ठ द्बठ्ठस्रद्ग3) के आधार पर स्वयं ही वेतन व भत्तों की दोहराई हो जाएगी।
भारत में जागरण जोश डॉट काम (द्व.द्भड्डद्दह्म्ड्डठ्ठद्भशह्यद्ध.ष्शद्व) के अनुसार केन्द्रशासित प्रदेश पांडुचेरी तथा दिल्ली को मिलाकर 31 राज्यों में कुल 4120 विधायक हैं। उपरोक्त डॉट काम के अनुसार तेलंगाना में प्रत्येक विधायक को सबसे अधिक 2.50 लाख तथा त्रिपुरा के विधायक को सबसे कम 34 हजार वेतन मिलता है। ये आंकड़े 12 जनवरी 2018 के हैं। पंजाब में इस समय विधायक का वेतन 1.14 लाख रु. प्रति महीना है।
पूर्वोतर राज्यों में विधायकों का वेतन कम है। ज्ञातव्य है कि पिछले सात वर्षों में विधायकों के औसत वेतन में लगभग 125′ वृद्धि हुई है।
पंजाब में विधानसभा सचिवालय द्वारा दी गई सूचना जो वेबसाइट पर भी उपलब्ध है के अनुसार मई 2017 मास से प्रत्येक विधायक को 84000/- वेतन तथा पैट्रोल/डीजल के लिए प्रति विधायक 30 हजार रु. दिए गए हैं। अन्य भत्ते इसके इलावा हैं। सूचना अधिकार कानून के अंतर्गत विधानसभा सचिवालय द्वारा दी गई सूचना जो पंजाबी में छपने वाले दैनिक समाचार पत्र ‘जगबाणी’ में प्रकाशित हुई है के अनुसार अक्तूबर 2016 में भूतपूर्व विधायकों की पैंशन में की वृद्धि के पश्चात एक बार विधायक बनने के बाद 15 हजार बेसिक पैंशन में 50′ डी.ए. जोडऩे के बाद उस पर 234′ मंहगाई भत्ता दिया जाता है। एक से अधिक बार विधायक बनने पर प्रतिवर्ष 2000/- के हिसाब से प्रत्येक टर्म की दस हजार बेसिक पैंशन पहली टर्म में शामिल हो जाती है। इस प्रकार दो बार विधायक बनने वाला व्यक्ति 1 लाख 25 हजार, तीन बार विधायक बनने वाला 1 लाख 75 हजार, चार बार बनने पर 2 लाख 25 हजार तथा इसी प्रकार बढ़ते-बढ़ते 9 बार विधायक बनने वाला व्यक्ति 4 लाख 75 हजार रु. पैंशन प्रति मास प्राप्त करेगा। इस समय श्रीमति राजिन्दर कौर भ_ल, स. लाल सिंह, सरवण सिंह फिल्लौर प्रत्येक 3 लाख 25 हजार पैंशन प्रतिमास प्राप्त कर रहे हैं। इसी प्रकार कुछ भूतपूर्व विधायक 2.75 लाख और कुुछ 2.25 लाख पैंशन प्राप्त कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त 9 भूतपूर्व विधायक ऐसे हैं जो सांसद के साथ-साथ भूतपूर्व विधायक की पैंशन भी प्राप्त कर रहे हैं।
विधायकों व भूतपूर्व विधायकों को उपरोक्त, के अतिरिक्त दैनिक भत्ता, यात्रा भत्ता, मैडीकल सुविधा, ट्रेन में यात्रा व सुरक्षा की अनेक सुविधाएं प्राप्त हैं किन्तु इन सबके बावजूद दिसम्बर 2018 में विधायकों, मंत्रियों तथा भूतपूर्व विधायकों के वेतन, भत्ते, पैंशन व अन्य सुविधाओं में वृद्धि के लिए तजवीज लाई गई। जिसका पता चलते ही पंजाब में सोशल मीडिया तथा प्रिंट मीडिया में भारी विरोध हुआ। जिस कारण वह तजवीज धरी धराई रह गई।
पंजाब राज्य जो कर्ज के बोझ में दबा हुआ है यहां न तो कर्मचारियों को दो वर्ष से मंहगाई भत्ता दिया गया है न ही वेतन आयोग की रिपोर्ट जारी की जा रही है। नई नियुक्तियां या तो की ही नहीं जा रही या फिर तीन वर्ष तक एकमुश्त नाम मात्र वेतन पर की जा रही हैं। रैगुलर करने के नाम पर अध्यापकों का वेतन 66′ तक कम कर दिया गया है। रोजगार के साधन उपलब्ध न होने के कारण नवयुवक नशे के शिकार हो रहे हैं तथा इसी कारण दिन दिहाड़े लूटपाट की घटनाएं बढ़ रही हैं। विधवाओं, अंगहीनों, वृद्धों तथा बेसहारा लोगों को दी जाने वाली 200/-रू. प्रतिमास की राशि कई-कई महीनों तक नहीं दी जा रही। खजाने में से सेवामुक्त कर्मचारियों व बीमारों के बिल निकालने पर रोक लगी हुई है। बेरोजगार राज्य से भारी संख्या में नवयुवक सब कुछ दांव पर लगाकर विदेशों में जाने के लिए उतावले हैं। पंजाब की रीढ़ की हड्डी यहां की कृषि, कृषक तथा खेतिहर मकादूर सांस तोड़ रहे हैं, आत्म हत्याएं प्रतिदिन हो रही हैं, स्कूल, सडक़ें, अस्पताल, पानी सप्लाई करने की योजनाएं सबकी सब बेची जा रही हैं, ऐसे समय में पंजाब के मंत्री, विधायक व भूतपूर्व विधायक न केवल पूरी शानौ-शौकत की किांदगी जी रहे हैं बल्कि अपनी सुविधाएं और बढ़ाने की फिराक में हैं। कुछ दिन पहले ‘पंजाबी ट्रिब्यून’ में छपे लेख के अनुसार 2017 वर्ष की तुलना में 2018 में जॉब/नौकरियों में नोट करने योग्य कमी आई है लेकिन देश के कर्णधार अपनी सुविधाएं व वेतन ्रह्वह्लश द्वशस्रद्ग पर डाल रहे हैं ताकि उनकी सुविधाएं खुद-ब-खुद बढ़ती रहें। लोग मंहगाई, गरीबी, बेरोकागारी व शोषण की चक्की में बुरी तरह पिस रहे हैं और‘ नीरो (हमारे शासक) बाँसुरी बजा रहे हैं।’