भारतीय रेल के जुझारू ट्रेड यूनियन संगठन-आल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसियेशन (एआईएलआरएसए) के आह्वान पर देश भर में लोको पायलटों वा सहायक लोको पायलटों ने भारतीय रेल के समस्त 17 क्षेत्रीय कार्यालयों के समक्ष 17 जुलाई सुबह 9 बजे से आरंभ कर 19 जुलाई सुबह 9 बजे तक-48 घंटे की सामूहिक भूख हड़ताल करके धरने दिये। रेल गाडिय़ां चला रहे लोको पायलटों समेत अपने घरों पर डयूटी देने के बाद विश्राम कर रहे लोको पायलटों ने भी यह 48 घंटे भूख हड़ताल रखकर इसमें भाग लिया। इस भूख हड़ताल के दौरान दो रेल लोको पायलट जो कि अपनी डयूटी पर, अर्थात रेल चला रहे थे, का स्वास्थ्य बिगडऩे के कारण अस्पताल भर्ती करवाने के बाद देहांत हो गया। इस तरह, केरल पालघाट के एन.के.राजू तथा रतलाम मध्य प्रदेश के मुनीश गोडवानी, शहीद का दर्जा प्राप्त कर गये। समस्त भारत में 800 लोको पायलटों को स्वास्थ्य बिगडऩे के चलते अस्पतालों में भर्ती करवाना पड़ा। वे लगभग सभी अपनी डयूटी के दौरान भूख हड़ताल पर थे। यहां यह वर्णन योग्य है कि भारतीय रेल में इस समय 85000 लोको पायलट व सहायक लोको पायलट कार्यरत हैं जबकि 15000 से अधिक पद रिक्त हैं।
इस भूख हड़ताल एक्शन की प्रमुख मांगें थीं, 1980 के फार्मूले के अनुसार किलोमीटर भत्ता दिया जाये, 2016 से पहले सेवामुक्त रनिंग स्टाफ को भी 7वें वेतन आयोग के अनुसार वर्तमान सेवामुक्त कर्मचारियों को मिल रही पैन्शन के बराबर पैन्शन दी जाये। वर्तमान समय में मिल रहा किलोमीटर भत्ता 1980 के फार्मूले के अनुसार किलोमीटर भत्ते का मात्र एक-तिहाई भाग ही है।
इस भूख हड़ताल के दैरान अन्य भी बहुत महत्त्वपूर्ण संबंधित समस्यायें उभारी गई थीं ताकि उनका समाधान किया जाये। वर्तमान में एक लोको पायलट को 72 घंटे से भी अधिक अपने स्टेशन से बाहर रहना (ह्रह्वह्ल स्ह्लड्डह्लद्बशठ्ठ) पड़ता है-अर्थात डयूटी पर रहना पड़ता है जबकि नियम है कि किसी भी स्थिति में 48 घंटे अर्थात दो दिन से अधिक किसी भी लोको पायलट को स्टेशन से बाहर (ह्रह्वह्ल स्ह्लड्डह्लद्बशठ्ठ) नहीं रखा जा सकता। यह मुद्दा अति महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे रूप में यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा है। लोको पायलट जिस कैबिन में बैठकर रेल चलाता है, उसका तापमान 58 डिग्री सेल्सीयस तक होता है। लंबा समय यहां बैठने से लोको पायलट का स्वास्थ्य बिगड़ सकता है तथा रेल दुर्घटना हो सकती है। एक अन्य मुद्दा यह भी था कि लोको पायलट से यदि चूक होकर लाल सिग्नल पार हो जाये (स्क्क्रष्ठ) तो उसे बिना किसी नुकसान हुये भी नौकरी से निकाल दिया जाता है। यह घोर अन्याय है, इसकी समीक्षा की जाये तथा इसे हुये नुकसान तथा कार्य-स्थितियों से जोड़ा जाये।
भारतीय रेल, दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नैटवर्क है, जिसकी स्थापना 8 अप्रैल 1845 को हुई थी। आज 173 साल बाद इसकी रेल लाईनों की कुल लंबाई 1 लाख 21 हजार 407 किलोमीटर है, जिसमें से 93 लाख 902 किलोमीटर रेल पथ, रनिंग रेल पथ है। रोजाना 13000 से अधिक यात्री रेलें व 9200 माल भाड़ा ट्रेनें दौड़ती हैं, जिनमें प्रतिदिन 2 करोड़ 50 लाख यात्री यात्रा करते हैं। तथा यह 32 लाख टन के करीब माल प्रतिदिन ढोतीं हैं। इसके कुल 7349 रेलवे स्टेशन हैं। 2017-18 वित्तीय वर्ष में इसकी कुल आय 1.874 लाख करोड़ रुपये थी। इतनी व्यापक व देश की रीढ़ की हड्डी मानी जाने वाली सेवा के सबसे महत्त्वपूर्ण श्रेणी के कर्मचारी 48 घंटे की भूख हड़ताल पर रहे, जैसे बताया जा चुका है कि 800 को डयूटी के दौरान स्वास्थ्य बिगडऩे पर अस्पताल भर्ती करवाया गया तथा दो शहीद हो गये, परंतु, फिर भी देश के रेल मंत्री व रेल प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं सरकी। तूफान से पहले की शांति कायम है, पता नहीं कब यह एक भीषण विस्फोट का रूप धारण कर ले।
(23.7.2018)