साथी पृथ्वी सिंह गोरखपुर की याद में प्रभावशाली सैमीनार हरियाणा राज्य के सर्वप्रिय किसान नेता दिवंगत साथी पृथवी सिंह गोरखपुरिया के जन्म दिन के उपलक्ष्य में उनके पैतृत गांव गोरखपुर में ‘‘वर्तमान कृषि संकट एवं समाधान’’ विषय पर एक प्रभावशाली सैमीनार आयोजित किया गया। उनकी याद में निर्मित समारक स्थल के सभागार में आयोजित इस सैमीनार की अध्यक्षता साथी पृथवी सिंह यादगारी कमेटी के अध्यक्ष साथी कृष्ण स्वरूप सिंह गोरखपुरिया ने की। सैमीनार में सुप्रसिद्ध किसान नेता एडवोकेट श्रद्धानंद सोलंकी, देहाती मजदूर सभा पंजाब के वित्तीय सचिव साथी महीपाल एवं भूतपूर्व बागवानी अधिकारी डाकटर बलवीर सिंह भ्याण ने संबंधित विष्य पर अपना-अपना पक्ष रखा। तीनों वक्ताओं ने निवर्तमान तथा भूतपूर्व केंद्रीय एवं प्रांतीय सरकारों की किसान विरोध-खेती विरोधी नीतियों को वर्तमान कृषि संकट के लिये जिम्मेदार ठहराया। शासक वर्गों एवं देशी-विदेशी कार्रोरेट घरानों के धनअंबार में अभूतपूर्व वृद्धि करने वाली नवउदारवादियों नीतियों के दुष्परिणामों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि किसान लहर, देश के समस्त जनतांत्रिक आंदोलन का एक अविभाजीय अंग है एवं कृषि तथा किसान संकट का अंतिम तथा न्यायपूर्ण समाधान जनतांत्रिक आंदोलन की समग्र सफलता से ही जुड़ा हुआ है। इस अवसर पर अनेेक गणमान्य विभूतियों को सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में दिवंगत तथा पृथवी सिंह का समूचा परिवार एव मित्रगण भी शामिल हुए। साथी तेजिंद्र सिंह थिंद, मंदीप सिंह नथवान, सुखचैन सरपंच, निर्भय, राजेश चौबाय भी उपस्थित रहे।
पलाट प्राप्ति का शानदार विजयी संघर्ष हरियाणा के जिला फतेहाबाद के खण्ड. रतिया के गांव जाखन दादी के भूमीहीन परिवारों ने विगत दिनों रिहायशी पलाटों की प्राप्ति के लिये विजयी संघर्ष लड़ा। श्रमिक वर्ग के अभूतपूर्व धैर्य का परिचय देते हुए यह परिवार देहाती मजदूर सभा के राज्य उपाध्यक्ष जीत सिंह की अध्यक्षता में पूरे 42 दिन धरने पर रहे एवं 27 दिन भूख हड़ताल रखी। हरियाणा राज्य समिति, देहाती मजदूर सभा के महासचिव तेजिन्द्र थिंद, सुखचैन सिंह, मंदीप सिंह नथवान, निर्भय सिंह, रवि कुमार, परमजीत सिंह लाली भी संघर्ष के अंग-संग रहे। हरियाणा राज्य किसान संघर्ष समिति के संयोजक साथी कृष्ण स्वरूप एवं साथियों ने भी पूर्ण सहयोग दिया। अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन के नेता रामचन्द्र भी उपस्थिति दर्ज कराते रहे। मजदूरों के संघर्ष को शहरी संगठनों ने भी वर्णनीय सहयोग दिया जिसके चलते लंगर, टैंट, साऊंड आदि अन्य खर्चों में कोई बाधा नहीं आई। मजदूरों के संघर्ष के सामने झुकते हुए ग्राम पंचायत एवं ग्राम सभा द्वारा प्लाट देने का प्रस्ताव पास करके जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार को भेजा गया। जिला अधिकारियों ने धरने में पहुंच साथियों की भूख हड़ताल समाप्त करवाई एवं पलाट वितरित करने संबंधी सभी औपचारिकताएं शीघ्र पूरी करने का आश्वासन दिया।
ह्रर्षोलास से मनाई अंबेदकर जयंती शहीद भगत सिंह नौजवान सभा पंजाब-हरियाणा की हरियाणा राज्य समिति के आह्वान पर राज्य की पंजाब सीमा से सटे कस्बे जाखल के निकटतम गांव सिधाणी में एक विशाल जन सभा एवं संस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संविधान निर्माता बाबा साहिब डाक्टर भीम राव अंबेदकर की जयंती को सर्मपित इस कार्यक्रम में भारतीय क्रान्तिकारी माक्र्सवादी पार्टी के महासचिव साथी मंगत राम पासला मुख्य वक्ता थे। वर्णनीय है कि जाखल, सिधाणी एवं क्षेत्र के अन्य गांवों के सैकड़ों युवा कार्यकर्ता एक विशाल दुपहिया जलूस के साथ साथी पासला की अगवानी करते हुए उन्हें सभा स्थल लेकर पहुंचे। रतिया से चला यह दोपहिया वाहन काफिला क्षेत्र के अनेकों गांवों एवं कस्बा जाखल से होते हुए सिधाणी पहुंचा। जन सभा को साथी पासला के अलावा नौजवान सभा अध्यक्ष साथी मंदीप सिंह नथवान, तेजिन्द्र सिंह थिंद, सुखचैन सिंह सरपंच एवं अनेक गणमान्य विभूतियों ने संबोधित किया। क्षेत्र के हजारों लोगों ने देर रात गये तक धैर्य से वक्ताओं के भाषणों को सुना अपने भावपूर्ण वकतव्य में साथी पासला ने डाकटर अंबेदकर के कष्टपूर्ण एवं संघर्षमयी जीवन को श्रद्धा से याद करते हुए शोषित वर्गों के उत्थान के लिये किये गये उनके कार्यों के लिए उन को गर्व एवं सम्मान से नमन किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहिब जिस मुक्ति एवं समानता के लक्ष्य की प्राप्ति के लिये जीवन भर संघर्षरत रहे, आज की केंद्र की मोदी सरकार एवं उसके कथित मार्गदर्शक राष्ट्रीय स्वय सेवक संघ तथा सहयोगी संगठन उस लक्ष्य को तहस-नहस कर देने के षडय़ंत्रों में संलिप्त हैं। उन्होंने इस दिशा में हाल ही में, देश के सर्व उच्च न्यायालय द्वारा अनूसूचित जाति-जनजाती के विरुद्ध अत्याचार उन्मूलन कानून 1989 में संशोधन कर इस कानून को मृतप्राय: कर देने के कुप्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि यह कदम केन्द्रीय सरकार एवं न्यायपालिका की मिलीभुगत का दुष्परिणाम है। साथी पासला ने 2 अप्रैल के ऐतिहासिक भारत बंद के लिये देश के शोषित वर्गों को क्रान्तिकारी अभिनंदन करते हुए आह्वान किया कि यह संघर्ष जीत तक हर हाल में जारी रखा जाना चाहिए। उन्हों ने लोगों की मूलभूत समस्याओं जैसे बेरोजगारी, अशिक्षा, मूल्यवृद्धि, कंगाली, भुखमरी आदि के लिये नवउदारवादी नीतियों की जिम्मेदार ठहराते हुए इनके विरुद्ध भी अविचल संघर्ष का आह्वान किया।