शिव अमरोही
जब भी मनुष्य, मानव जाति के कल्याण को छोड़ देता है और उसका व्यक्तितगत लालच उस पर हावी हो जाता है तो यह लालच मानव जाति के लिए खतरा बन जाता है। रेत, बजरी व मिट्टी के लालच के लिए भी बड़े भारी पैमाने पर देश भर में खनन किया जा रहा है और इसके लिए बनाए गए सभी कायदे कानून छींके पर रख दिए गए हैं। अभी कुछ महीने पहले केरल में बाढ़ से जो भयंकर तबाही हुई है पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार भारी वर्षा के साथ-साथ पूर्वी तथा पश्चिमी घाटों में खनन माफिया द्वारा पिछले पंद्रह वर्षों में बड़े पैमाने पर किया गया गैर कानूनी खनन भी इसका बड़ा कारण था। लेकिन लगता है कि केरल की भयंकर तबाही से भी देश के अन्य राज्यों की सरकारें, विशेष तौर पर पंजाब सरकार जागी नहीं है तथा पंजाब में रेत-बजरी मिट्टी-खनन माफिया पहले से भी अधिक सक्रिय हो गया है। यह माफिया पंजाब के अनेक क्षेत्रों में सक्रिय है लेकिन सतलुज व ब्यास नदियां तथा इनकी सहायक नदियां नाले इस काम के लिए खनन माफिया के पसंदीदा क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों में अधिकारियों और राजनीतिज्ञों की इस माफिया से कितनी मिलीभुगत है उसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ब्यास तथा सतलुज नदियों के साथ साथ किए जा रहे खनन के लिए ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पंजाब सरकार को पचास करोड़ का जुर्माना लगाया है, इसके बावजूद यह गैर कानूनी खनन बदस्तूर जारी है।
यहां हम हाजीपुर-तलवाड़ा क्षेत्र (जो पंजाब के जिला होशियारपुर के नीम पहाड़ी व कंडी क्षेत्र का भाग है) में चल रहे गैर कानूनी खनन का जिक्र करना चाहेंगे। मुकेरियां से तलवाड़ा-दौलतपुर-ऊना सडक़ के पूर्व की ओर ब्यास नदी पंजाब व हिमाचल प्रदेश की सीमा रेखा का काम करती है। मुकेरियां से तलवाड़ा तक यह सीमा रेखा ब्यास नदी के साथ साथ चलती है तथा तलवाड़ा से दौलतपुर चौंक की ओर 15 किलो मीटर तक अर्थात भटोली गांव तक यह सीमा रेखा ब्यास की स्वां नदी के पूर्व में हिमाचल प्रदेश तथा पश्चिम में पंजाब का क्षेत्र है। सन 2012 में अकाली-बी.जे.पी. सरकार की दूसरी पारी आरंभ होते ही हाजीपुर कस्बे के उत्तर-पूर्व व उत्तर-पश्चिम में स्टोन क्रैशर लग गए व तलवाड़ा तक का क्षेत्र इनकी मार में आ गया। पिछले दो वर्षों में तलवाड़ा से भी आगे स्वां नदी के किनारे पर अनेक स्टोन क्रैशर स्थापित हो चुके हैं। इन स्टोन क्रैशरों के पास खुदाई का कोई लाइसैंस ही नहीं है। ये कच्चे माल को तोडऩे का लाइसैंस लेकर कई स्थानों पर तो 100-100 फुट तक खुदाई करके जमीनें बर्बाद कर चुके हैं। क्रैशर मालिकों के अनुसार वे कच्चा माल हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर प्रदेश से लाते हैं जबकि उनके आस-पास के लंबे-चौड़े व गहरे खुदाई किए हुए क्षेत्र उनका मुंह चिढ़ाते हैं। इससे भी हैरानी की बात यह है कि जिला होशियारपुर में किसी भी खड्ड या नदी की रेत मिट्टी या बजरी के लिए नीलामी ही नहीं हुई है। जब भी कोई चैकिंग टीम किसी स्टोन करैशर पर रेड डालती है तो पहले ही सूचना मिल जाने के कारण स्टेन क्रैशर मालिक अपनी मशीनें आदि इधर उधर भेज कर छिपा देते हैं। वैसे इनकी चैकिंग आदि तभी होती है जब प्रभावित इलाका निवासियों का संघर्ष तेज होता है अन्यथा ये स्टोन क्रैशर दिन रात चलते रहते हैं। हाजीपुर क्षेत्र के पूर्व-उत्तर दिशा में ब्यास नदी के पार इंदौरा क्षेत्र में (हिमाचल प्रदेश) सरकारी आंकड़ों के अनुसार 43 में से 25 स्टोन क्रैशर ही चल रहे हैं जबकि वास्तव में एक भी स्टोन क्रैशर बंद नहीं है। इसी प्रकार खनन विभाग के मुकेरियां के महा अभियंता (एक्सीएन) के अनुसार तलवाड़ा हाजीपुर में 18 स्टोन क्रैशर हैं जो नियमानुसार बंद हैं। लेकिन वास्तव में यह धड़ल्ले से चल रहे हैं। इन के आसपास पानी के छिडक़ाव का कोई प्रबंध नहीं है न ही इनके चारों और वृक्षों की पट्टियां हैं। प्रथम जुलाई से 30 सितंबर से निषेध समय में भी ये लगातार चलते रहते हैं। लोगों को डरा धमका कर या लालच देकर किसानों की जमीनें खरीद ली जाती हैं तथा गहरे गड्ढों के आसपास की जमीन अपने आप इन गड्डों में गिरती रहती है जिसे मजबूरीवश किसान बेच देते हैं।
हाजीपुर-तलवाड़ा क्षेत्र में खनन के कारण ब्यास पर बने पौंग बांध तथा शाह नहर बैराज को भी गंभीर खतरा हो सकता है, ऐसा पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है। गहरी खुदाई से न केवल धरती के नीचे पानी का स्तर गहरा होता जाएगा बल्कि पानी की गुणवत्ता पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा। खनन की ढुलाई में लगे भारी ट्रकों व ट्रालों के कारण गांवों की सम्पर्क सडक़ों का नामोनिशान तक मिट गया है। ट्रक व ट्राले के ड्राईवर व सहायक गांववासियों को धमकाते हैं तथा कई बार औरतों के साथ अभद्रता के मामले भी सामने आए हैं, कई छात्रों व लोगों की दुर्घटनाओं में जान भी गंवानी पड़ी है। स्टोन क्रैशरों की आवाज व भारी वाहनों का यातायात इलाके में आवाज प्रदूषण फैला रहा है। सबसे घातक क्रैशरों से निकलने वाले मिट्टी के अत्यंत बारीक कण हैं जो कई किलोमीटर तक लोगों के स्वास्थ्य पर प्रभाव डालते हैं। इलाके में अनेक लोग दमा, सांस तथा कई अन्य प्राण घातक बिमारियों से ग्रस्त हो चुके हैं।
स्टोन क्रैशरों से दुखी इलाका निवासियों ने पंजाब के इलाके में ‘खनन रोको जमीन बचाओ संघर्ष कमेटी’ के बैनर तले सन् 2014 से स्टोन क्रैशरों द्वारा की जा रही भारी तबाही का विरोध शुरू किया था। विरोध से बौखलाए खनन माफिया ने संघर्ष कमेटी नेताओं को धमकियां दीं बल्कि उन पर जानलेवा हमले करने के प्रयत्न भी किए गए। लेकिन लोगों के संगठन के आगे उनकी एक न चली। इस पर राजनीतिज्ञों, पुलिस तथा प्रशासन के साथ मिलकर संघर्ष कमेटी के नेताओं पर झूठे मुकद्दमें दर्ज करवा कर एक नेता धर्मेन्द्र सिंह को जेल भेज दिया गया। एक और झूठे मुकद्दमें में (जिस में शिकायतकर्ता कभी हाजिर ही नहीं हुआ) संघर्ष कमेटी के पांच नेताओं को साल भर एस.डी.एम. की कचहरी में बार-बार तारीख डाल कर परेशान करने की कोशिश की गई।
संघर्ष कमेटी के झंडे तले हाजीपुर के आसपास के गांवों के लोगों विशेषतय: औरतों ने सम्पर्क सडक़ों तथा उन पर बने हुए पुलों की दिन रात रक्षा करने के लिए लगातार पहरेदारी की है तथा उनकी समझ में यह बात भी आने लगी है कि पहले अकाली-बीजेपी तथा अब कांग्रेस पार्टी के राजनेता खनन माफिया की पीठ पर हैं। वास्तव में इन पार्टियों के नेताओं की खनन में किसी न किसी रूप में भागीदारी है। संघर्ष कमेटी के झंडे तले चलाए जा रहे इस आंदोलन से खनन माफिया पर कुछ रोक अवश्य लगी है। जहां जहां गावों के लोग जागरूक हुए हैं, वहां के कई स्टोन कै्रशर मालिक अब तलवाड़ा से आगे स्वां नदी के किनारे अपने नए स्टोन क्रैशर लगा चुके हैं या लगा रहे हैं। इसलिए इस क्षेत्र के लोगों को भी जागृत करना ‘खनन रोको जमीन बचाओ संघर्ष कमेटी’ का लक्ष्य होना चाहिए। नहीं तो नई आर्थिक नीतियों वाला यह कार्पोरेट माडल पूरे देश को खा जाएगा।