स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् यह पहला अवसर है जब किसी शासक दल ने सेना द्वारा राष्ट्र की सुरक्षा हेतु की गई सेनिक कार्यवाही को अपने राजनीतिक हित साधने के लिये इस्तेमाल किया है। यह कुकर्म मौजूदा शासक दल भाजपा व उसके कथित मार्ग दर्शक संघ व उसके सहयोगी संगठनों ने इन चुनावों में बड़े पैमाने पर किया है। इस से जुड़ा यह तथ्य और भी अधिक खतरनाक है कि कार्य स्वंयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह द्वारा किया जा रहा है। थाने (महाराष्ट्र) में संघ परिवार के प्रिय संगठन विश्व हिन्दु परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने संगठन के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय अशोक सिंघल की याद में हुए समागम में बोलते समय भाजपा सरकार की इस कार्यवाही को सही ठहराते हुए कहा कि ‘‘यह कार्य देश के मौजूदा राजनैतिक नेतृत्व की इच्छाशक्ति को दर्शाता है तथा इसे पूरी शानो-शौकत से जारी रखा जाना चाहिए।’’ क्या आलोक कुमार का उक्त वक्तव्य चुनाव आयोग द्वारा घोषित चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है या नहीं इस का सही-सही उत्तर तो चुनाव आयुक्त ही दे सकते हैं?
भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान के विरुद्ध तीन युद्ध लड़े हैं। 1971 की लड़ाई में तो पाक नेतृत्व की हठधर्मी तथा सांप्रदायिक फासीवादी सोच के चलते यह देश विभाजित भी हो गया था। यह भी सर्वविदित है कि नये राष्ट्र बांग्ला देश के गठन में भारतीय सेनाओं की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका थी।
सरकार चाहे किसी भी दल की हो, सेनाओं ने देश हित में सरकारी आदेशों का पालन करते हुए कार्यवाही करनी होती है। अनेक अवसरों पर शासक पक्ष द्वारा अपने संकीर्ण राजनैतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए या अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने हेतु घरेलू मोर्चे पर सेनाओं का अपने देशवासियों के विरुद्ध कार्यवाहियों में अनुचित प्रयोग भी किया गया। ऐसी परिस्थितियों में एकाधिक बार सेनाओं की किरकिरी भी हुई। परंतु फिर भी सेना ने भारतीय संविधान की मर्यादा अनुसार कत्र्तव्य का पालन निष्ठा एंव ईमानदारी से किया। ऐसा करते हुए सेनाओं ने यह भी सुनिश्चित किया कि कोई भी राजनीतिक दल अपने राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए इसका दुरुपयोग न कर सके तथा न ही अपनी कतारों में कभी राजनैतिक आक्षांकाओं को पनपने दिया। परंतु वर्तमान चुनाव में इन परंपराओं को तहस-नहस करते हुए भाजपा नेताओं, विशेषत: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह द्वारा सभी गैर भाजपा दलों तथा भाजपा विरोधी नागरिकों को राष्ट्रद्रोही तथा सेनाओं का मनोबल गिराने का दोषी ठहराया जा रहा है। भाजपा की इन आग से खेलने वाली कार्यवाहियों के बहुत गंभीर एवं खतरनाक परिणाम निकलने की पूरी पूरी संभावनाएं हैं। ज्ञात रहे कि सभी देशवासी देश की सीमाओं की रक्षा हेतु एवं राष्ट्र हित में की गई सभी कार्यवाहियों को पूर्णता: समर्थन देते हैं। सेना समूचे राष्ट्र की है न कि किसी दल विशेष की जैसा कि यू.पी. के मुख्य मंत्री ‘योगी’ जैसे गैरजिम्मेदार तथा संकीर्ण मानसिकता वाले नेता कह रहे हैं। भाजपा की इन कार्यवाहियों का नतीजा सेना को कमजोर एवं अनुशासनहीन बनाने मेेें निकल सकता है। सभी देशवासियों को इस बात से चौकन्ना होना होगा। चुनाव के मुद्दे भाजपा का छद्म राष्ट्रवाद या राष्ट्र की सुरक्षा या सीमाओं की रक्षा हेतु की गई कार्यवाहियां नहीं होने चाहिये। इसके विपरीत गरीबी, बेकारी, अशिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं की सभी को एक समान उपलब्धता, भुखमरी, चौतरफा भ्रष्टाचार, औरतों-दलितों-अल्प संख्यकों के विरुद्ध हो रहा भेदभाव एवं अत्याचार, सभी देशवासियों के लिए सम्मानीय सामाजिक सुरक्षा आदि वह मुद्दे होने चाहिये, जिनसे कि लोग अत्याधिक पीडि़त हैं। सभी राजनैतिक दलों को अनिवार्यत: इन मुद्दों पर अपनी कारगुजारी व संघर्ष के आधार पर जनमत हासिल करना चाहिये।
– मंगत राम पासला