रवि कंवर
बोलीविया की वामपंथी सरकार का 14 वर्ष का शानदार प्रदर्शन
लातीनी अमरीका का देश, बोलीविया, एक ऐसा देश है, जहां पिछले 14 वर्षों से वामपंथी राष्ट्रपति ईवो मोरालेज चुनाव जीत कर 14 वर्षों से निरंतर सत्तासीन हैं। यह एक पहाड़ों, जंगलों की बहुतायत वाला देश है, जिसे समुद्र नहीं लगता। इसकी जनसंख्या 1 करोड़ 11 लाख से थोड़ी अधिक है तथा क्षेत्रफल 4 लाख 24 हजार वर्ग मील है। इस सदी के प्रारंभ में वेनेजुएला के स्वर्गीय राष्ट्रपति व इस महाद्वीप के नामचीन वामपंथी नेता साथी हूगो शावेज से प्रभावित होकर ईवो मोरालेज साम्राज्यवाद विरोधी धारा का भाग बने थे। यहां यह वर्णनीय है कि साथी मोरालेज व उनकी पार्टी एम.ए.एस. (मूवमैंट टुवाडर्ज सोशलिज्म), देश के प्राकृतिक संसाधनों के निजीकरण के विरुद्ध संघर्षों की उपज हैं। यह देश कुदरती गैस के भंडारों से संपन्न व नशीले पदार्थ कोकीन के निर्माण के लिए उपयोग में आने वाले कच्चे पदार्थ कोका का सबसे बड़ा उत्पादक है। एम.ए.एस., यहां के मूल निवासियों के सामाजिक आंदोलनों, शहरी क्षेत्रों की झुग्गी-झौंपड़ी बस्तियों के निवासियों के संगठित आंदोलनों तथा परंपरागत माक्र्सवादियों, ट्रेड यूनियनों व बुद्धिजीवियों के कुछ भागों द्वारा चलाए गए संयुक्त आंदोलनों में से उभरी एक वामपंथी पार्टी है। बोलीविया की कुल जनसंख्या का दो तिहाई भाग वहां के मूल निवासी कबीले हैं। साथी मोरालेज भी वहां के मूल कबीले आयमारा से संबंध रखते हैं।
उन्होंने 2005 में चुनाव जीतकर प्रथम बार सत्ता संभाली थी। देश में प्राकृतिक संसाधनों के निजीकरण के विरुद्ध चल रहे आंदोलन, 500 सालों के औपनिवेशिक शासन के कारण देश के मूल निवासियों के हाशिये पर चले जाने से पैदा हुई पीड़ा तथा साम्राज्यवादी विश्वीकरण पर आधारित नवउदारवादी आर्थिक व सामाजिक नीतियों के कारण लोगों में व्याप्त कंगाली व बेचैनी के विरुद्ध लोगों का यह फतवा था। 2005 से ही देश में भिन्न-भिन्न स्तरों पर हो रहे जनवादी चुनावों में जीत प्राप्त करके यह साम्राज्यवाद विरोधी वामपंथी पक्ष सत्ता में निरंतर बना हुआ है। देश के निजी क्षेत्र के कंट्रोल वाले मीडिया के कुसत्य आधारित प्रचार तथा प्रतिक्रियावादी राजनीतिक पक्षों द्वारा साम्राज्यवाद की शह पर हर तरह के प्रयत्नों के बावजूद भी वामपंथी सरकार 13 वर्षों से ‘परिवर्तन की प्रक्रिया’ को निरंतर सफलतापूर्वक आगे बढ़ा रही है। किसी देश की सफलता के मुख्य संकेतकों-आर्थिक विकास, स्वास्थय व शिक्षा, विदेश नीति आदि के क्षेत्र में जब मोरालेज की वामपंथी सरकार ने सत्ता संभाली थी तो देश व विश्व के वरिष्ठ विशेषज्ञों, जो कि पूंजीवादी धारा से संबंध रखते थे, ने उसके पूर्ण रूप से असफल रहने तथा संकट में फंस जाने की भविष्यवाणियां की थीं। परंतु वामपंथी सरकार द्वारा उपरोक्त सभी क्षेत्रों में की गई प्रगति को वे पूंजीपति विशेषज्ञ भी झुठलाने में बेबस हो गए हैं।
अर्थव्यवस्था
2005 में जब बोलीविया में वामपंथ ने सत्ता संभाली थी तो देश की अर्थव्यवस्था में चहुं ओर अफरा-तफरी मची थी। देश में शासन कर रही सरकारें पूंजीवादी अवधारणा कि खुला बाजार, लचीला श्रम बाजार व मुद्रा संबंधी नीतियां ही आर्थिक विकास की कुंजी हैं, का पूरी शिद्दत से अनुसरण कर रही थीं। लगभग 200 सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों बहुराष्ट्रीय कंपनियों को कौडिय़ों के भाव बेची जा चुकी थीं तथा इससे देश की अर्थव्यवस्था को 22 अरब अमरीकी डालर की क्षति पहुंची थी। इससे देश की जी.डी.पी. (कुल घरेलू उत्पाद) में घातक क्षरण हुआ था तथा 1985 के अंतिम दिनों में मुद्रास्फिति की 8000 प्रतिशत तक पहुंच गई थी।
ऐसी स्पष्ट नीतिगत असफलता के बावजूद जब 2005 में वामपंथ ने सत्ता संभाली थी तो कई निवेशक इस भय से देश छोड़ गए थे कि ‘समाजवाद’ आर्थिक बर्बादी मचा देगा।
परंतु, हुआ इससे बिल्कुल विपरीत। वामपंथ के 13 वर्ष के शासन के दौरान एक आर्थिक चमत्कार हुआ, जिसे अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष भी स्वीकार करने के लिए मजबूर है। देश की अर्थव्यवस्था 2005 के मुकाबले में तिगुनी हो गई है। बोलीविया आज लातीनी अमरीका की सबसे तेजी से विकास कर रही अर्थव्यवस्था का दर्जा ग्रहण कर गई है। बावजूद इसके कि इस समय के दौरान उसके मुख्य निर्यातों की कीमतें अंतर्राष्ट्रीय बाजार में काफी कम हो गई हैं। मुद्रास्फिति की दर नगण्य सी, मात्र 1.5 प्रतिशत है। जबकि उसका पड़ोसी देश अर्जेंटीना जिसने नवउदारवादी सामाजिक व आर्थिक माडल अपना कर, अमरीकी साम्राज्यवाद की तो वाह-वाही ले ली है। परंतु उसके बावजूद मुद्रास्फिति की दर आसमान छू रही है। एम.ए.एस. की वामपंथी सरकार की आर्थिक क्षेत्र में सबसे बड़ी उपलब्धि है, गरीबी को दूर करने में उसे प्राप्त हुई सफलता। 2005 में जब साथी मोरलेज ने सत्ता संभाली थी उस समय देश की कुल जनसंख्या का 60 प्रतिशत भाग गरीबी की रेखा के नीचे जीवन व्यतीत करने के लिए मजबूर था तथा देश एक मानवीय संकट का सामना कर रहा था। आज देश में गरीबी की रेखा के नीचे रहने वालों की दर 30 प्रतिशत तक रह गई है।
वामपंथी सरकार ने यह उपलब्धि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा पेश किए जाते नवउदारवादी आर्थिक सामाजिक माडल को नकारते हुए प्राप्त की है। उसने जन समर्थक आर्थिक-सामाजिक माडल अपनाया है। बड़े व महत्त्वपूर्ण उद्योगों का राष्ट्रीयकरण किया गया है। अब उन उद्योगों से मिलता मुनाफा सीधा सरकार के पास आता है। उसका उपयोग पूंजी निवेश के लिए किया जाता है तथा देश भर में व्यापक स्तर पर आधारभूत ढांचे से संबंधित परियोजनाएं, जो कि आर्थिक विकास के विशाल कारक सिद्ध हुई हैं, सफलता सहित पूर्ण हुई हैं। सरकारी क्षेत्र में ट्रांसपोर्ट व औद्योगिक विनिर्माण ने भी आर्थिक विकास को प्रोत्साहित किया है जो कि खुले बाजार में संभव नहीं था।
स्वास्थ्य व शिक्षा
वामपंथी सरकार के विरोधियों द्वारा यह प्रचार निरंतर किया जाता है कि स्वास्थ्य व शिक्षा के मामले में बहुत कम प्रगति हुई है। यह इसके बावजूद है, जबकि पहली मार्च से देश में ‘सर्वव्यापी स्वास्थ्य योजना’ भी लागू कर दी गई है।
यह बिल्कुल दरुस्त है कि जिस तरह का स्वास्थ्य ढांचा क्यूबा में कायम है, उस तरह का ढांचा अभी बोलीविया में नहीं बनाया जा सका है। फिर भी स्वास्थ्य सेवा व शिक्षा के मामले में 2005 के मुकाबले स्थिति बहुत सुधरी है। यह भी सत्य है कि इसका अधिक लाभ ग्रामीण, दूर-दराज के क्षेत्रों में बैठे उन लोगों को मिला है, जिन्हें शहर केंद्रित मीडिया कवर नहीं करता तथा जो ऐसी सुविधाओं से पहले पूर्ण रूप से वंचित थे।
2006 से 2018 के बीच ‘मी सालुद’ कार्यक्रम में, क्यूबा के डाक्टरों की सहायता से 1 करोड़ 64 लाख निशुल्क स्वास्थ्य चैक-अप किए गए हैं, जिनमें से ‘आपरेशन मिरेकल’ परियोजना के अंतर्गत 7 लाख आंखों के आपरेशन भी निशुल्क किए गए हैं तथा इन कार्यक्रमों द्वारा देश के सबसे गरीब व दूरदराज क्षेत्रों में बसे देशवासियों तक स्वास्थ्य सेवायें पहुंचाई गईं हैं, अमेजन व एंडियन जंगलों तक।
शिक्षा के क्षेत्र में भी उपलब्धियां कायाकल्प कर देने वाली हैं। हां, निजी क्षेत्र के कंट्रोल वाला मीडिया उन्हें दिखाने का कष्ट नहीं करता। वर्ष 2000 जब व्यापक स्तर पर स्कूलों का निजीकरण हो रहा था, प्राइमरी स्कूल आयु के मात्र 35 प्रतिशत बच्चे ही स्कूलों में जाते थे, अब इनकी संख्या दोगुनी हो गई है तथा यह निरंतर बढ़ रही है। पुन: यह लाभ देश के अति गरीब, ग्रामीण व दूरदराज क्षेत्रों में बसे देशवासियों को पहुंच रहा है। हर सप्ताह लगभग एक सरकारी स्कूल खुल रहा है। शिक्षा क्षेत्र में हुई इस प्रगति को भी केवल सरकारी मीडिया ही दिखाता है। पूंजीपतियों के स्वामित्व वाला मीडिया इसे दिखाने से परहेज ही करता है।
पहली मार्च से तो देश भर में ‘युनीफाइड हैल्थ सिस्टम’ (एस.यू.एस.) के नाम की निशुल्क ‘सर्वव्यापी स्वास्थ्य सेवा योजना’ भी लागू कर दी गई है। कोचाबांबा जिले से खुद राष्ट्रपति ईवो मोरालेज ने इसे प्रारंभ किया। इस योजना के लिए फंड सरकार के स्वामित्व वाले संस्थान प्रदान करेंगे। इसके लिए सरकार ने वर्ष 2019 के लिए 20 करोड़ अमरीकी डालर की राशि की व्यवस्था की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन व पैन-अमरीका स्वास्थ्य संस्था ने बोलीविया सरकार की स्वास्थ्य संबंधी नीति को ‘उल्लेखनीय’ तथा लातीनी अमरीका के लिए माडल करार दिया है।
प्रभुसत्ता
बोलीविया के वर्तमान इतिहास में 2003 का वर्ष सबसे बुरा वर्ष था, उस वर्ष ‘काला अक्तूबर’ हत्याकांड ही नहीं घटा था बल्कि उस समय के सत्ताधारियों ने देश की संप्रभुता को अमरीकी साम्राज्यवाद के पास गिरवी रख दिया था। तत्कालीन सरकार ने अमरीका से एक समझौता हस्ताक्षरित करके देश में अमरीकी सैनिकों व नागरिकों को देश के कानून व न्याय प्रणाली से छूट प्रदान कर दी थी, तथा उन्हें सजा देने का आधिकार केवल अमरीकी सरकार को दे दिया था। यहां यह वर्णनीय है कि पिछली सदी के अंतिम दशक में ‘नशीले पदार्थों के विरुद्ध युद्धॠ’ के नाम पर अमरीका ने बोलीविया सहित लगभग सभी लातीनी अमरीकी देशों में सैनिक अड्डे कायम कर लिए थे तथा अपने सलाहकार भेज दिए थे जो कि उन देशों के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करते हुए बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हितों की रक्षा के लिए प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप में मेहनतकश लोगों पर अत्याचार करते थे।
2005 में राष्ट्रपति मोरालेज ने सत्ता संभालने के बाद अमरीका की ऐसी नीतियों के विरुद्ध स्पष्ट संकेत देते हुए तथा अपने देश की संप्रभुत्ता को कायम रखने के लिए कदम उठाते हुए अमरीका के सैनिक अड्डों को ही देश से बाहर नहीं किया बल्कि तथाकथित अमरीकी सहायता एजंसी-‘यू.एस.एड’, ‘डी. ई. ए’ के साथ ही अमरीकी राजदूत को भी देश निकाला दे दिया। अमरीकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बड़े निवेश के बावजूद उनके हितों को आघात पहुंचाते हुए देश के महत्त्वपूर्ण उद्योगों का सफलतापूर्ण राष्ट्रीयकरण कर दिया, इस तरह देश के विकास से संबंधित महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने का अधिकार अपने हाथों में ले लिया। उनके इस निर्णय से देश की अर्थ-व्यवस्था का कायाकल्प हो गया।
वर्तमान समय में घटी एक घटना देश की वामपंथी सरकार की अपने देश के मान-सम्मान के लिए डटने तथा स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम रहने की पुष्टि करती है। पिछले दिनों ब्राजील के अति-दक्षिणपंथी राष्ट्रपति जैर बोलसोनारे की सरकार के एक प्रतिनिधि ने बोलीविया के मूल निवासियों के विरुद्ध एक नस्लवादी टिप्पणी कर दी। राष्ट्रपति मोरालेज ने तुरंत इसकी सख्त निंदा की तथा उस द्वारा माफी मांगे जाने की मांग की। यहां यह वर्णनीय है कि बोलीविया बड़ी मात्रा में गैस ब्राजील को निर्यात करता है तथा अंतर्राष्ट्रीय सीमा लगने के कारण उससे सहयोग की भी आवश्यकता होती है। परंतु, इसके बावजूद राष्ट्रपति मोरालेज ने अपने देश की संप्रभुत्ता के मद्देनजर अपने देश के मान-सम्मान को कायम रखने के लिए कड़ा रुख अपनाया।
जब 2005 में राष्ट्रपति मोरालेज ने देश की बागडोर अपने हाथों में ली थी, उस समय देश नवउदारवादी नीतियों से त्रस्त दयनीय स्थिति में था। आज अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा, विदेश नीति, देश की संप्रभुत्ता की रक्षा के मामले में अच्छी प्रगति हुई है तथा उस द्वारा की गई प्रगति को संपूर्ण विश्व ने मान्यता प्रदान की है। देश के मूल निवासियों के मुख्यधारा में शामिल होने से उनके मान-सम्मान में बढ़ौत्तरी भी हुई है तथा उनमें राष्ट्रीय व सांस्कृतिक गौरव की भावना का भी संचार हुआ है। इजारेदार पूंजी के हाथों से छीन कर महत्त्वपूर्ण उद्योगों के राष्ट्रीयकरण से एक बार पुन: ‘समाजवादी माडल’ की सार्थकता सिद्ध की है, जिसे कि सोवियत यूनियन के नष्ट होने के उपरांत गहरा आघात पहुंचा था। साम्राज्यवादी विश्वीकरण के नवउदारवादी सामाजिक-आर्थिक नीतियों के मुकाबले पुन: एक बार इस समाजवादी माडल को बल प्राप्त हुआ है। 20 अक्तूबर को पुन: होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में अवश्य ही साथी ईवो मोरालेज को इसका लाभ मिलेगा तथा वे लातीनी अमरीकी महाद्वीप में अमरीकी साम्राज्यवाद के नए हमले को परास्त करते हुए पुन: शानदार जीत प्राप्त करेंगे।