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जन संघर्ष (संग्रामी लहर – जनवरी 2019)

जन संघर्ष (संग्रामी लहर – जनवरी 2019)

आर. एम. पी. आई. की लामिसाल ‘‘अधिकार रैली’’ में उमड़ा जन-सैलाब

भारतीय क्रांतिकारी माक्र्सवादी पार्टी (आर. एम. पी. आई.) की केंद्रीय समिति की 8 से 10 दिसंबर तक हुई तीन दिवसीय बैठक के उपरांत पार्टी की प्रांतीय समिति की तरफ से जालंधर शहर के बर्लटन पार्क के विशाल मैदान में एक बहुत ही प्रभावशाली ‘‘अधिकार रैली’’की गई।
इस ऐतिहासिक रैली में शामिल मेहनतकश जनसमूहों की संख्या बारे मीडिया के एक बड़े हिस्से द्वारा 50 हज़ार तक के अनुमान लगाये गए। पंजाब के हर जि़ले से, हज़ारों की संख्या में मज़दूरों, किसानों, नौजवानों, औरतें, कर्मचारियों व अन्य मेहनतकश लोगों ने इस रैली में पूर्ण उत्साह से शिरकत की। बहुत से जिलों जैसे कि पठानकोट, तरनतारन, अमृतसर, जालंधर, गुरदासपुर, लुधियाना आदि से बड़े-बड़े काफि़लों के रूप में लोग आकाश चीरते नारे नारे मारते हुए रैली में शामिल हुए। इसके लिये सैंकड़ों की संख्या में विशेष बसों व अन्य वाहनों का प्रयोग किया गया। बहुत से जिलों जैसे पठानकोट, तरन तारन, अमृतसर,जालंधर, गुरदासपुर, लुधियाना आदि से बड़े बड़े काफिले रेल द्वारा पहुंचे। इसके अतिरिक्त एक अनुमान के अनुसार पार्टी कार्यकत्ताओं ने रैली में शामिल होने के लिए 126 बसों, 209 फोर व्हीलर टाटा 407, 6 ट्रालियों, टाटा सूमों वर्ग की गाडिय़ों समेत 115 कारों व 150 मोटरसाईकलों का उपयोग किया।
रैली में ग्रामीण मज़दूरों, निर्माण मज़दूरों, किसानों और घरेलू मज़दूर औरतों की संख्या बहुत ही उत्साहजनक थी। बेरोजगार नौजवान भी बड़ी संख्या में अधिकार रैली में शामिल हुये। लोगों के इस लामिसाल जोश और उत्साह के सामने रैली के लिए बनाया गया पंडाल स्पष्ट रूप में छोटा पड़ गया दिखाई देता था। पार्टी के लाल झंडों और मेहनतकश लोगों की माँगों-उमंगों को दर्शाते बैनरें के साथ पंडाल को सुरूचिपूर्ण ढंग से सजाया गया था। इसके साथ समूचा वातावरण  ही क्रांतिकारी रंग में रंगा दिखाई देता था।
रसूलपुर के प्रसिद्ध ढाडी जत्थे की ओर से गाये गये क्रांतिकारी गीतों के द्वारा रैली को प्रारंभ करने के उपरांत ठीक 12.30 बजे ‘‘अधिकार रैली’’ का कार्यक्रम शुरू किया गया। इस रैली की अध्यक्षता के लिये साथी रत्न सिंह रंधावा, रघबीर सिंह, नीलम घुमान, दर्शन नाहर व नत्था सिंह पर आधारित अध्यक्षीय मंडल का चयन किया गया। अध्यक्षीय मंडल के अतिरिक्त पार्टी की केंद्रीय समिति और प्रांतीय सचिवालय के सभी सदस्य भी स्टेज पर सुशोभित थे। एम.सी.पी.आई.(यू) के महासचिव व पोलिट ब्यूरो के दो सदस्य भी स्टेज पर बिराजमान थे। जम्मू-कश्मीर से आए एक साम्यवादी नेता भी स्टेज की शोभा में बढ़ा रहे थे।
रैली के आरंभ में आर.एम.पी.आई. के चेयरमैन कामरेड के.गंगाधरन, महासचिव कामरेड मंगत राम पासला, वित्त सचिव कामरेड राजिन्दर परांजपे, स्टैंडिंग समिति सदस्य कामरेड के.एस.हरीहरन और एम.सी.पी.आई.(यू) के महासचिव कामरेड मुहम्मद गौंस को अध्यक्षीय मंडल की तरफ से लाल रंग के शाल भेंट करके सम्मानित किया गया।
इसके उपरांत पार्टी के प्रांतीय सचिव कामरेड हरकंवल सिंह ने उपस्थित मेहनतकश लोगों के विशाल जनसमूहों के साथ अधिकार रैली का उद्देश्य सांझा किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सत्ताधारियों की ओर से भारतीय संविधान में दर्ज लोगों के बुनियादी जनवादी अधिकारों की बहुत तेज़ी उल्लंघना की जा रही है। तथा मेहनतकश लोगों को बहुपक्षीय लूट का शिकार बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस कारण लोगों के भीतर सरकारों के विरुद्ध पैदा रोष को सांगठनिक रूप दे कर क्रांतिकारी दिशा में जन संघर्ष लामबंद करना समय की मुख्य आवश्यकता बन गई है।
केंद्रीय समिति के सदस्य कामरेड गुरनाम सिंह दाऊद ने रैली को संबोधन करते केंद्र व राज्य सरकारों की ओर से समाज के सबसे अधिक शोषित वर्ग, विशेष रूप में दलितों के अधिकारों से मुकम्मल रूप में पीठ फेर लेने की ज़ोरदार शब्दों में आलोचना की। उन्होंने कहा कि सत्तासीन पार्टियाँ मतदान के समय लोगों के साथ जो वायदे करती हैं। राजगद्दी तक हाथ पहुंचते ही उन को भुला देती हैं और आम लोगों पर अत्याचार आरंभ कर देती हैं। उन्होंने कहा कि बार बार वायदे करने के बावजूद न भूमिहीन ग्रामीण मज़दूरों को रिहायशी प्लाट मिल रहे हैं और न उनके लिए गुजारेयोग्य रोजगार का कोई बंदोबस्त किया जाता है। न उनके बच्चों के लिए गुणवत्तायुक्त शिक्षा के कोई प्रबंध हैं और न ही सरकारी अस्पतालों में कोई स्वास्थ्य सेवायें मिलती हैं। उन्होंने यह भी दोष लगाया कि मोदी सरकार मनुवादी वर्ण व्यवस्था को पुर्नजागृत करने के लिए प्रयत्नशील है, जिससे दलितों व अन्य गरीबों पर सामाजिक उत्पीडऩ और हिंसक हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
महाराष्ट्र से आए आर.एम.पी.आई. के वित्त सचिव कामरेड राजिन्दर परांजपे ने अधिकार रैली की शानदार सफलता के लिए पंजाब के मेहनतकश लोगों को गरिमापूर्ण बधाई दी। उन्होंने महाराष्ट्र में उभरे किसान आंदोलन की चर्चा करते हुये कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने किसानों के साथ किये वायदे पूरे नहीं किये। परिणामस्वरूप किसानों की समस्याएँ बढ़ी हैं और मजबूरीवश किसानों की तरफ से आत्महत्याएँ की जा रही हैं। उन्होंने मोदी सरकार की सांप्रदायिक-फाशीवादी नीतियों के विरुद्ध जन-संघर्ष तीखे करने का आह्वान भी किया।
केरल से आए केंद्रीय समिति के सदस्य कामरेड पी. कुमारनकुट्टी ने अपने भाषण के द्वारा पिछले दिनों केरल में सत्ताधारियों की लापरवाही और खनन माफिया की लूट के कारण आई बहुत ही भयानक बाढ़ के बारे में बात करते लोगों की तरफ से बाढ़ पीडि़तों को भेजी गई सहायता की ज़ोरदार प्रशंसा की। उन्होंने मेहनतकश लोगों की निरंतर बढ़ रही मुश्किलों के लिए केंद्र और राज्य सरकार की कॉर्पोरेट समर्थक नीतियों को जि़म्मेवार ठहराते हुये, नवउदारवादी आर्थिक नीतियों के विरुद्ध विशालतर से विशाल संघर्ष लामबंद करने का आह्वान किया। कामरेड कुमारनकुट्टी ने सबरीमाला मंदिर के मुद्दे पर भाजपा की दोहरी पहुँच की भी निंदा की और नन बलात्कार कांड में केरल की बहादुर बहनों व अन्य इन्साफ पसंद लोगों के समर्थन में जनवादी स्त्री सभा पंजाब की तरफ से जालंधर में दोषी पादरी के विरुद्ध किये गए प्रदर्शन की भरपूर प्रशंसा की।
केंद्रीय समिति सदस्य कामरेड कुलवंत सिंह संधू ने अपने भाषण के द्वारा भारत में दिनों दिन गंभीर होते जा रहे कृषि संकट के लिए सरकारों की किसान-विरोधी नीतियों को जि़म्मेवार ठहराया और किसानों को इनके विरुद्ध मिलकर ज़ोरदार संघर्ष छेडऩे का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसानों की फसलें मंडियों में पड़ी रहती हैं तथा कौडियों के भाव खरीदी जाती हैं। जिस कारण किसान कर्जदार हो रहे हैं जबकि दूसरे ओर व्यापारी और मिल मालिक मालामाल हो रहे हैं। उन्होंने पंजाब में अफसरशाही और मिल मालिकों की मिलीभुगत के कारण गन्ने की फ़सल के हो रहे नुकसान के लिए मुख्यमंत्री पंजाब को सीधे तौर पर जि़म्मेवार ठहराया। प्रांत में बिजली के बिलों की माफी आदि के लिए किसान-संगठनों की ओर से मिलकर लड़े गए संयुक्त संघर्षों के परिणामस्वरूप हुई उपलब्धियों का जि़क्र करते कामरेड संधू ने किसानों के कर्ज माफ करने और स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशों के अनुसार सभी फसलों के भाव निश्चित कराने और उनकी सरकारी खरीद सुनिश्चित करने के लिए शक्तिशाली संघर्ष करने का आह्वान किया।
इस दौरान, तामिलनाडु से आए आर.एम.पी.आई. के चेयरमैन कामरेड के.गंगाधरन ने ‘‘संग्रामी लहर’’ के हिंदी प्रवेशांक का लोर्कापण किया और आशा प्रकट की कि यह पत्रिका क्रांतिकारी आंदोलन के विकास में बड़ी हद तक मददगार सिद्ध होगा।
तेलंगाना से आऐ एम.सी.पी.आई.(यू) के महासचिव कामरेड मुहम्मद गौंस ने रैली को संबोधन करते हुये अधिकार रैली की शानदार सफलता के लिए पार्टी को बधाई दी। देश की मौजूदा चिंताजनक राजनैतिक अवस्था की चर्चा करते हुये उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि साम्राज्यवाद निर्देशित नवउदारवादी नीतियों के कारण मेहनतकश लोगों की निरंतर बढ़ती जा रही मुसीबतों को रोकने के लिए तथा सांप्रदायिक फाशीवादी आँधी को रोकने के लिए देश की संघर्षशील वामपंथी शक्तियों की एकजुटता समय की अहम माँग है। उन्होंने कहा कि वामपंथी शक्तियों को एकजुट करके ही पूंजीवादी-जागीरदार समर्थक सरकारों की जन विरोधी नीतियों को पराजय दी जा सकती है।
अंत में आर.एम.पी.आई. के महासचिव कामरेड मंगत राम पासला ने अपने भावनाओं से भरपूर भाषण के द्वारा देश की वर्तमान राजनैतिक अवस्था की विस्तार सहित विवेचना की। उन्होंने कहा कि मोदी को आगे लगा कर सत्ता पर काबिज़ हुए आर.एस.एस. ने देश के पूरे ढांचे को अपनी जकड़ में ले लिया है। न्यायपालिका, कार्यपालिका, रिज़र्व बैंक व चुनाव कमीशन जैसे महत्त्वपूर्ण संस्थान भी उस की जकड़ में हैं। कोई भी ऐसी संविधानिक संस्था नहीं बची, जिसे मोदी सरकार ने क्षति ना पहुंचाई हो।
उन्होंने कहा कि बर्तानवी साम्राज्यवाद के खि़लाफ़ आज़ादी की लड़ाई लड़ते समय आज़ादी संग्रामियों ने धर्म निरपेक्षता और समानता पर आधारित एक स्वस्थ जनतंत्र के सपने देखे थे परन्तु आज मोदी सरकार साम्राज्यवादी देशों के साथ भागीदारी करके देश की पूरी अर्थव्यवस्था को बहुराष्ट्रीय निगमों के हवाले कर रही है।
उन्होंने कहा कि मोदी के नेतृत्व में समस्त संघ के साथी संगी अपना सांप्रदायिक-फाशीवादी एजेंडा बड़ी बेशर्मी से लागू कर रहे हैं। वह जनवाद व धर्म निरपेक्षता का गला घोंट कर एक धर्म आधारित राज्य कायम करने की ओर बढ़ रहे हैं। बुनियादी और लोकतांत्रिक अधिकारों की बात करने वालों गुनाह हो गया है। ऐसी बात करना को पाकिस्तान और बंगलादेश भेजने की धमकियां दीं जातीं हैं, उन पर हमले किये जाते हैं। कई ऐसे हितैषी बुद्धिजीवी व जनवादी कार्यकर्ताओं पर झूठे केस ड़ाल कर जेलों में भेज दिए गए हैं।
कामरेड पासला ने कहा कि मोदी सरकार की ओर से लागू की जा रही जनविरोधी नीतियों के कारण निरंतर बढ़ रही बेरोजगारी, महँगाई और भ्रष्टाचार ने लोगों के भीतर व्यापक बेचैनी पैदा की हुई है। उन्होंने कहा कि इन नीतियों के कारण स्वास्थ्य व शिक्षा सुविधायें लोगों की पहुँच से बाहर हो गई हैं। गरीब लोग कुपोषण और भुखमरी से मर रहे हैं। इन वास्तविक मुद्दों पर से ध्यान हटाने के लिए लोगों को राम मंदिर और गऊ हत्या जैसे मुद्दों में उलझाया जा रहा है ताकि भाजपा व उसके भ्रष्ट सहयोगियों द्वारा सत्ता पुन: हासिल की जा सके।
उन्होंने यह बात ज़ोर दे कर कही कि देश की एकता -अखंडता के लिए तथा पैदा हुये आर्थिक संकट से मुक्ति के लिए भारतीय जनता पार्टी को हराना बहुत आवश्यक है। समय की आवश्यकता है कि सांप्रदायिक-फाशीवादी और नवउदारवादी नीतियों के मुकाबले के लिए वामपंथी जनवादी ताकतें एकजुट हो कर जन लामबंदी तेज़ करें। उन्होंने कहा कि वामपंथी पार्टियों को चाहिए कि वे एक न्यूनतम संयुक्त कार्यक्रम के आधार पर एक मंच पर इकट्टी हों।
कामरेड पासला ने केंद्रीय समिति की तरफ से स्वीकृत किये गए अगले एक्शन कार्यक्रम का भी ऐलान किया और पार्टी के आह्वान पर आये तथा मौसम की खऱाबी के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में अधिकार रैली में शामिल हुए मेहनतकश लोगों का तथा पार्टी की वित्तीय सहायता करने वाले साथियों का पुरज़ोर धन्यवाद किया।
रैली के दौरान पार्टी की ओर से वित्तीय सहायता के लिए की गई अपील को भी बहुत ही उत्साहजनक उत्तर मिला। इस उद्देश्य के लिए मौके पर वालंटियरों द्वारा बाल्टियों द्वारा धन-संग्रहण किया गया। इस तरह 55687 रुपये की राशि संग्रहित हुई जो कि रैली के अंत में घोषित की गई। इस के अतिरिक्त वरिष्ठ साम्यवादी नेता कामरेड त्रिलोचन सिंह राणा और उनकी धर्मपत्नी कामरेड मनजीत कौर ने एक लाख रुपए, की सहायता दी। इसी तरह आस्ट्रेलिया निवासी डाक्टर अनिल गौतम व उनकी पत्नी डाक्टर सोनिया गौतम ने अपने पिता, रेल कर्मचारियों के सेवामुक्त वरिष्ठ नेता कामरेड टी. आर. गौतम के द्वारा अपनी स्वर्गीय माता तुप्ता गौतम की स्मृति में पार्टी को 51000 रुपये की सहायता दी तथा संगरूर के कस्बा दिड़बा में पार्टी का झंडा बुलंद रखने वाले कामरेड भीम सिंह दिड़बा ने भी एक लाख रुपए देकर पार्टी की सहायता की।
रिपोर्ट : रवि कँवर

हरियाणा के ढंढूर गांव में सरकारी स्कूल की समस्या विरुद्ध धरना
हिसार जिले के गांव ढंढूर में सरकारी स्कूल की समस्या को लेकर लगातार दो महीने धरना दिया गया और शिक्षा मंत्री का पुतला जलाया गया। राम प्रकाश, अवतार व पूरी टीम आंदोलन में शामिल रही। पहले स्थानीय साथियों ने इस आंदोलन की शुरुआत की। स्कूल का रिजल्ट बहुत निराशा वाला रहता है, सफाई का कोई उचित प्रबंध नहीं है, स्कूल की मुख्य अध्यापिका बच्चों के अभिवावकों से गलत व्यवहार करती है आदि मागों को लेकर यह आंदोलन किया जा रहा है। परंतु प्रशासन ने आंदोलन पर कोई ज्यादा ध्यान नही दिया। शहीद भगत सिंह नौजवान सभा के दखल के बाद प्रशासन हरकत में आया। जब उपायुक्त के दफ्तर पर धरना देने का फैसला हुआ, तब जाकर कार्यवाही का आश्वासन देने शिक्षा अधिकारी धरना स्थल पर पहुंचे। जल्द ठोस कदम उठाने की बात कही। आश्वासन को देखते हुये धरना खत्म किया गया। यदि जल्दी कार्यवाही न हुई तो आंदोलन फिर शुरू किया जायेगा।
रिर्पोट : मनदीप नथवान

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