Now Reading
निर्माण मजदूरों के अधिकार छीन रही हैं सरकारें मजदूर आंदोलन तेज करना होगा

निर्माण मजदूरों के अधिकार छीन रही हैं सरकारें मजदूर आंदोलन तेज करना होगा

शिव कुमार पठानकोट
देश भर में निर्माण मजदूरों की आर्थिक स्थिति तथा जीवन स्तर निरंतर नीचे जा रहा है। केंद्र व राज्य सरकारों की ओर से मजदूरों की मुश्किलों को दूर करने के लिए पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। निर्माण मजदूरों की आर्थिक तथा सामाजिक सुरक्षा के लिए देश भर के मजदूरों की लंबी जदोजहद के बाद ‘निर्माण कानून 1996’ (The Building and Other Construction Workers Regulation of Employment & Condition of Service Act1996) सरकार को बनाने के लिए मजबूर किया गया था। देश की अलग-अलग  राज्य सरकारों ने भी इस कानून को पूर्ण रूप से लागू करने के लिए ध्यान नहीं दिया, इस कारण देश भर में निर्माण कार्य में लगे करोड़ों निर्माण मजदूरों को इस कानून का लाभ नहीं मिल पा रहा। देश के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दर्जनों बार सरकारों को आदेश दिये हैं कि निर्माण कार्य में लगे मजदूरों की जल्द से जल्द  राजिस्ट्रेशन कीजिए और उनको मिलने वाली लाभकारी योजनाओं में, खासकर उनके बच्चों की शिक्षा और परिवार के सदस्यों की बिमारी के समय स्वास्थ्य सुरक्षा पर अधिक से अधिक पैसा खर्च किया जाए। लेकिन सरकारें सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को भी अनदेखा कर रही हैं।
पंजाब में 2017 के विधानसभा चुनाव के समय कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने वोट लेने के लिए बड़े-बड़़े वायदे किये थे । पंजाब की कांग्रेस सरकार बनते ही कैप्टन मंत्रिमंडल ने अगस्त 2017 में  निर्माण मजदूरों को मिलने वाली लाभकारी योजनाओं में कुछ बढ़ौत्तरी करने, रजिस्ट्रेशन व नवीनीकरण की प्रक्रिया आसान करने की बजाय ‘आफ-लाईन’ सिस्टम को एकतरफा रूप में बंद कर दिया, बिना किसी तैयारी के ‘आन-लाईन’ सिस्टम चालू कर मजदूर विरोधी फैसला कर डाला। जिसके चलते निर्माण मजदूरों को मिलने वाली लाभकारी योजनाओं, नई रजिस्ट्रेशन व नवीनीकरण का सारा काम ठप्प पड़ गया है। पास हुई राशि भी मजदूरों के खाते में नहीं डाली जा रही ।
 बड़ी संख्या में मजदूर अनपढ़ या बहुत कम पढ़े लिखे है, ‘आन लाईन’ सिस्टम के तहत सुविधा ले पाना उनके लिए मुश्किल काम है। पंजाब के साथ लगते हरियाणा सरकार ने भी पहले यह आन-लाईन सिस्टम चालू किया था, लेकिन इस प्रक्रिया के फेल होने के बाद  हरियाणा सरकार को फिर से ‘आफ-लाईन’ सिस्टम चालू करना पड़ा। एक बात और है, यदि पंजाब सरकार ने समय रहते ‘आफ-लाईन’ सिस्टम को शुरू नहीं किया तो 1996 के कानून के तहत निर्माण मजदूरों को वितरण किये फंड में से 5 प्रतिशत मिलने वाला फंड का हिस्सा श्रम बोर्ड को नहीं मिलेगा। इस कारण इससे संबंधित बोर्ड के कर्मचारियों को मिलने वाले वेतन का भुगतान नहीं होगा और नौकरी भी जाने का डर है, मजदूरों के साथ-साथ वे भी परेशान होगे।
‘आन-लाईन’ सिस्टम को सुचारु रूप से लागू करने के लिए  हजारों नए सुविधा केंद्र खोलने तथा उसमें नई भर्ती करने की जरूरत थी, लेकिन सरकार ने पहले से चल रहे 2147 सुविधा केंद्रों  में से 1647 सुविधा सेंटर बंद कर, लोगों की दिक्कतों को और बढ़ा दिया है।इस सारे घटना क्रम के चलते पंजाब निर्माण मजदूर यूनियन की मुख्य मांग है कि पंजाब सरकार ‘आन-लाईन’ के साथ-साथ ‘आफ-लाईन’ सिस्टम तुरंत जारी करके मजदूरों को पेश आ रही दिक्कतों को दूर करे ।
साल 2016-17 के बाद निर्माण मजदूरों की लाभकारी योजनाओं में कोई बढ़ौतरी नहीं हुई, जबकि महँगाई लगातार बढ़ती जा रही है। मजदूरों को मिलने वाली लाभकारी योजनाओं, जैसे बच्चों की शिक्षा और बिमारी के समय इलाज का खर्च पूरा दिया जाए, लडक़ी की शादी के समय दी जाने वाली शगन स्कीम दुगुनी हो, प्रसूता राशि 25000 रूपये की जाए, बुढ़ापा पैन्शन कम से कम  4000  रुपये प्रति माह की जाएं और बाकी मिलने वाली सुविधाएँ  आसान तरीके से उपलब्ध करवाई जाऐं।
केंद्र व राज्य सरकारों की ओर से देश के बड़े पूंजीपतियों के पक्ष में लागू की जा रही आर्थिक नीतियों के कारण महँगाई, बेरोजगारी तथा  भ्रष्टाचार चर्म सीमा पर पहुंच चुका है। अमीर और अमीर होता जा रहा है, गरीब और गरीब हो रहा है । आर्थिक असमानता निरंतर बढ़ रही है,  जिस का अंदाजा देश की अलग-अलग राज्य सरकारों द्वारा अक्तूबर 2018 तक जारी की गई न्यूनतम मजदूरी दर से लगाया जा सकता है । दिल्ली और केरल में गैर शिक्षित मजदूर (Un-Skilled Worker) जहां न्यूनतम मजदूरी 14000 रुपये प्रति महीना है, को छोड़ कर बाकी सब राज्यों में न्यूनतम मजदूरी 6000 रुपए से लेकर 10000 रुपए के आसपास प्रति महीना की दर से निश्चित है, इस में एक लूट और है- यह मजदूरी आठ घंटे काम की है, लेकिन मजदूरों से 10-12 घंटे काम लेना आम बात है। दूसरी तरफ देश भर में मंत्री, लाखों रुपए और अफसर वेतन-भत्ता दो लाख पचास हजार रुपये से ऊपर प्रति माह ले रहे हैं और साथ में करोड़ों अरबों रुपये की राशि रिश्वत के रूप में लेकर सरकारी खजाने को लूट रहे हैं।
हरियाणा की बात करें तो वहां श्रम विभाग में 62 रजिस्टर्ड निर्माण मजदूर यूनियनें काम कर रही हैं। हरियाणा की श्री मनोहर लाल खट्टर सरकार ने 2017 में  एक प्रस्ताव लाकर केंद्रीय ट्रेड यूनियनो के साथ संबंधित चार निर्माण मजदूर यूनियन को छोड़ कर बाकी सब की पात्रता खत्म कर दी है। राज्य में अन्य संगठनों से जुड़े निर्माण मजदूरों का पंजीकरण कराने के लिए श्रम विभाग अधिकारी, पंचायत सचिव,पटवारी, विभाग के अफसरों या तहसीलदार से हस्ताक्षर करवाने के लिए भेज देते हैं । हर जिला श्रम बोर्ड कार्यालय की कार्य प्रणाली अलग-अलग है, यह भी एक दिक्कत है । लाभपात्र फार्म में हर साल बदलाव किया जाता है । साल 2017-18 से शिक्षा लाभकारी फार्म अक्तूबर से दिये जाते हैं इस से वर्करों व यूनियनों को मुश्किल आ रही है । सरकार के साथ संबद्ध यूनियन के काम को पहल दी जाती है,श्रम विभाग के अधिकारियों की मिलीभुगत से गैर निर्माण मजदूरों को रजिस्टर्ड किया जा रहा है और वास्तव में निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को वंचित किया जा रहा है। शिकायतों पर श्रम मंत्री व श्रम विभाग के उच्च अधिकारी हस्तक्षेप कर गलत आदमी का साथ दे रहे  हैं। इसके अतिरिक्त हरियाणा में निर्माण मजदूरों को और भी बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा रहा है ।
आंदोलन की बात करें तो पंजाब में जब से पंजाब की कैप्टन सरकार ने ‘आन-लाईन’ सिस्टम चालू किया तब से ही पंजाब निर्माण मजदूर यूनियन की ओर से लगातार तहसील, जिला तथा राज्य स्तर पर  धरना प्रदर्शन किया गया है । श्रम मंत्री पंजाब की मोहाली स्थित कोठी का घेराव करने के लिए 12 जुलाई 2018 को गए हजारों की संख्या में निर्माण मजदूरों की एकतत्रा के बीच आकर नोडल अफसर  मोहाली ने श्रम मंत्री श्री बलबीर सिंह सिद्धू की ओर से मजदूरों को भरोसा दिलाया था कि दस दिन के अंदर अंदर ‘आफ-लाईन’ प्रक्रिया को शुरू कर दिया जाएगा। लेकिन आज तक श्रम मंत्री श्री बलबीर सिंह सिद्धू, मुख्य प्रिंसिपल सचिव पंजाब सरकार, मुख्य सचिव श्रम विभाग तथा लेबर कमिश्नर पंजाब की ओर से लगातार झूठे भरोसे अश्वासनों के बिना कुछ हासिल नहीं हुआ। देश भर में निर्माण मजदूरों की आर्थिक तथा सामाजिक सुरक्षा के लिए टैक्स के रूप इक_ा की गई राशि लगभग 40,000 करोड़ रुपये है जो मजदूरों की लाभकारी योजनाओं में खर्च करनी है, सरकारें इस तरफ ध्यान नहीं दे रहीं। पंजाब और हरियाणा की तरह देश भर के निर्माण मजदूरों की स्थिति तथा सरकारों की मजदूर विरोधी नीति एक जैसी है ।
उपरोक्त सभी दिक्कतों को दूर करने तथा  मुख्य मांगें जो हमारा अधिकार हैं, कोई भीख नहीं मांग रहे, उनको पाने के लिए नई रूप रेखा से जन आंदोलन खड़ा करना होगा। जैसे कि देश भर के किसान संगठनों ने एक मंच पर लाखों की संख्या में इक_ा हो कर 29-30 नवम्बर 2018 को दिल्ली में केंद्र की मोदी सरकार व अलग-अलग राज्य सरकारों को किसानों की बात सुनने के लिए मजबूर किया है । वैसे  ही निर्माण मजदूरों को, जिनकी संख्या लाखों में नहीं बल्कि करोड़ों में है की इस शक्ति को संगठित करने व संघर्ष में डालने की जरूरत है।
               (लेखक सी.टी.यू. पंजाब के वित्त सचिव हैं)  

Scroll To Top