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लखीमपुर खीरी हत्याकांड में न्याय के लिए आंदोलन किया जाएगा तेज

लखीमपुर खीरी हत्याकांड में न्याय के लिए आंदोलन किया जाएगा तेज

सिंघू बॉर्डर, 19 अक्टूबर (संग्रामी लहर ब्यूरो)- संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा किए गए रेल रोको आंदोलन को कल देश भर से व्यापक समर्थन मिला है। किसान समूहों द्वारा विभिन्न स्थानों पर आयोजित रेल रोको कार्रवाई को लेकर अब भी अलग-अलग जगहों से रिपोर्ट आ रही है। गौरतलब है कि रेल रोको आंदोलन दिल्ली में भी बिजवासन रेलवे स्टेशन पर किया गया था। उत्तराखंड, झारखंड, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और अन्य राज्यों में आयोजित कार्रवाई की रपटें भी आज प्राप्त हुई है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश पुलिस के ज्यादती की भी खबरें भी आई हैं। कल एसकेएम के रेल रोको ने मोदी सरकार पर निश्चित दबाव बढ़ाया है – हजारों प्रदर्शनकारी किसानों ने सुनिश्चित किया कि उनके गुस्से का संदेश हर जगह भाजपा नेताओं तक पहुंचे; भाजपा के भीतर से भी कुछ आवाजें तेज हो रही हैं, जो अजय मिश्रा टेनी के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि लखीमपुर खीरी में वापस आए अजय मिश्रा टेनी ने लखीमपुर खीरी नरसंहार का दोष यूपी पुलिस की विफलता पर लगाया है। लखीमपुर खीरी नरसंहार के लिए यूपी पुलिस को जिम्मेदार ठहराने वाले कल के बयान उनके द्वारा बनाए जा रहे दबाव का प्रमाण हैं। एसकेएम इस नेता के शर्मनाक व्यवहार पर आश्चर्यचकित है, और यह साफ करता है कि एक मंत्री द्वारा दिए जा रहे ऐसे बयानों से पुलिस और जांच एजेंसियों पर दबाव बढ़ेगा। एसकेएम ने यह भी नोट किया कि सुमित जायसवाल जैसे सहअपराधियों को नरसंहार प्रकरण के लगभग तीन सप्ताह बाद कल ही पकड़ा गया। एसकेएम की मांग है कि अजय मिश्रा को तुरंत बर्खास्त और गिरफ्तार किया जाए, और ऐसा न करने पर लखीमपुर खीरी हत्याकांड में न्याय के लिए आंदोलन तेज किया जाएगा।

जुलाई 2021 के महीने में केंद्रीय कृषि मंत्री और कृषि राज्य मंत्री द्वारा निहंग सिख समूह के नेता से मुलाकात के बारे में नई रिपोर्टें सामने आई हैं, प्रत्यक्ष रूप से किसानों के आंदोलन के ‘समाधान’ के लिए। यह निहंग सिख नेता उसी समूह से हैं जो 15 अक्टूबर को सिंघू मोर्चा पर क्रूर यातना और हत्या में शामिल था। संयुक्त किसान मोर्चा एक बार फिर दोहराता है कि सिंघू मोर्चा हत्याकांड, भाजपा और उसकी सरकारों द्वारा महसूस किए जा रहे लखीमपुर खीरी नरसंहार के दबाव से ध्यान भटकाने की साजिश में डूबी हुई प्रतीत होती है, और इसकी तत्काल और गहराई से जांच की आवश्यकता है।

हालांकि किसी भी धर्म और आस्था की बेअदबी अस्वीकार्य है, और इसकी निंदा की जानी चाहिए, एसकेएम किसान आंदोलन में शामिल सभी नागरिकों से अपील करता है, कि वे आंदोलन में भटकाव पैदा करने के उद्देश्य से की जा रही साजिशों का शिकार न हों, और आंदोलन की प्रमुख मांगों को मनवाने के लिए अपना प्रतिरोध तेज करते रहें।

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गांधी जयंती पर चंपारण से शुरू हुई लोकनीति सत्याग्रह किसान जन-जागरण पदयात्रा उत्तर प्रदेश के बनारस जिले में प्रवेश कर गई है। कल सुबह पदयात्रा वाराणसी शहर में प्रवेश करेगी। इससे पहले आज यात्रा चौबेपुर से होकर गुजरी। आज गणमान्य नागरिकों द्वारा संबोधित एक विशाल जनसभा थी I एसकेएम की मांग है कि यूपी प्रशासन वाराणसी में यात्रा के समापन कार्यक्रमों के शांतिपूर्ण संचालन के लिए सभी आवश्यक प्रबंधन करे।

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